अवैध खनन पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट सख्त, नायब सरकार से पूछा- 'ठेकेदारों को सिर्फ जुर्माना लगाकर क्यों छोड़ा?'
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अवैध खनन पर हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है कि ठेकेदारों को केवल जुर्माना लगाकर क्यों छोड़ा गया और डिबार क्यों नहीं किया ...और पढ़ें

अवैध खनन पर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट सख्त (फाइल फोटो)
HighLights
अवैध खनन पर हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा।
ठेकेदारों को केवल जुर्माना लगाकर क्यों छोड़ा, डिबार क्यों नहीं?
शॉर्ट टर्म परमिट धारकों पर भी लंबी अवधि के नियम लागू।
राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में अवैध खनन के मामलों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से पूछा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों को केवल आर्थिक दंड लगाकर क्यों छोड़ दिया गया और उन्हें डिबार क्यों नहीं किया गया।
अदालत ने इस मामले में खान एवं भूविज्ञान विभाग के महानिदेशक को शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ देवेंद्र यादव द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने अदालत को बताया कि अवैध खनन में लिप्त पाए गए ठेकेदारों पर कुल 33 लाख 90 हजार 985 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सीधा सवाल किया कि जब ठेकेदार नियमों का उल्लंघन करते पाए गए तो उन्हें केवल जुर्माना लगाकर क्यों छोड़ दिया गया।
अदालत ने पूछा कि ऐसे लोगों को भविष्य के लिए खनन कार्यों से डिबार क्यों नहीं किया गया। जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि संबंधित ठेकेदार केवल शॉर्ट टर्म परमिट धारक थे।इस पर अदालत ने हरियाणा माइनर मिनरल कन्सेशन, स्टाकिंग, ट्रांसपोर्टेशन आफ मिनरल्स एंड प्रिवेंशन आफ इल्लीगल माइनिंग रूल्स-2012 की विस्तार से व्याख्या की।
खबरें और भी
कोर्ट ने कहा कि नियमों में “मिनरल कंसेशन” की परिभाषा केवल लंबी अवधि की माइनिंग लीज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें माइनिंग कान्ट्रैक्ट, परमिट, क्वारिंग परमिट और अन्य सभी प्रकार की खनन अनुमति शामिल हैं।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि नियमों के अध्याय 11 और 16 के तहत यदि कोई भी व्यक्ति खनन अनुमति की शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ समान कठोर कार्रवाई की जा सकती है, चाहे वह लंबी अवधि का पट्टाधारक हो या शार्ट टर्म परमिट धारक।
अदालत ने कहा कि नियमों में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि शार्ट टर्म परमिट धारकों को राहत दी जा सकती है। हाई कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि शार्ट टर्म परमिट भी “मिनरल कंसेशन” की श्रेणी में आते हैं और इनके उल्लंघन पर भी वही कठोर दंडात्मक परविधान लागू होते हैं जो अन्य खनन लीज धारकों पर लागू होते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने खान एवं भू-विज्ञान विभाग, हरियाणा के महानिदेशक को तीन सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करने को कहा है कि अवैध खनन में संलिप्त पाए गए ठेकेदारों को डिबार क्यों नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई 2026 को होगी।