Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    डेरा प्रमुख राम रहीम की अपील पर हाई कोर्ट में हुई सुनवाई, रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड की गोलियों की जांच हुई

    Updated: Wed, 18 Feb 2026 02:44 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की सजा के खिलाफ अपील की सुनवाई के दौर ...और पढ़ें

    कैप्शन: डेरा प्रमुख राम रहीम (जागरण फोटो)

    कैप्शन: डेरा प्रमुख राम रहीम (जागरण फोटो)

    HighLights

    1. हाईकोर्ट ने रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड की गोलियों का निरीक्षण किया

    2. बचाव पक्ष ने सीलबंद कंटेनर पर हस्ताक्षर पर सवाल उठाए

    3. अभियोजन ने फोरेंसिक विशेषज्ञ की स्पष्ट गवाही का तर्क दिया

    राज्य ब्यूरो, पंचकूला। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की सजा के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को मामले से संबंधित गोलियों की अदालत में भौतिक रूप से जांच की। लगभग सात वर्ष पहले इस मामले में डेरा प्रमुख को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके खिलाफ अपील पर सुनवाई जारी है।

    चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के आरंभ में केस प्रॉपर्टी के रूप में पेश की गई ‘लापुआ’ साफ्ट-लीड गोली का निरीक्षण किया। अदालत ने यह देखने का प्रयास किया कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ के कथित हस्ताक्षर या निशान उस गोली पर मौजूद हो सकते थे या नहीं, जबकि जिस प्लास्टिक कंटेनर में गोली रखी गई थी, उस पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की सील सुरक्षित और अक्षुण्ण बताई जा रही है।

    ट्रायल कोर्ट में खोले जाने तक सीलबंद में रखा गया

    अपील की सुनवाई में बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यही रहा कि पोस्टमार्टम के दौरान मृतक के शरीर से निकाली गई गोली को बरामदगी के समय से लेकर ट्रायल कोर्ट में खोले जाने तक सीलबंद रखा गया था।

    यदि दोनों सीलें सही-सलामत थीं, तो फॉरेंसिक प्रयोगशाला के विशेषज्ञ द्वारा गोली की जांच और उस पर हस्ताक्षर किए जाने का दावा कैसे संभव हुआ। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि कंटेनर पर एम्स की दोनों सीलें सही अवस्था में थीं और ऐसे में कंटेनर खोले बिना अंदर रखी वस्तु तक किसी की पहुंच संभव नहीं थी।

    खबरें और भी

    दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने कहा कि फॉरेंसिक विशेषज्ञ की गवाही ट्रायल कोर्ट में पूरी तरह स्पष्ट है और विशेषज्ञ ने स्वयं कंटेनर खोलकर जांच करने तथा आवश्यक हस्ताक्षर होने की बात कही थी। अभियोजन ने यह भी तर्क दिया कि ट्रायल के दौरान कंटेनर तक कथित पहुंच या पूर्व जांच को लेकर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी।

    हस्ताक्षर गोली पर है या कंटेनर पर

    सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने बताया कि यह गोली आयातित ‘लापुआ’ श्रेणी की साफ्ट-लीड गोली है, जिस पर समय के साथ स्पष्ट निशान बने रहना आवश्यक नहीं होता। इस पर खंडपीठ ने अवलोकन किया कि प्रस्तुत गोलियों पर कोई स्पष्ट निशान दिखाई नहीं दे रहा और यह स्पष्ट किया जाए कि हस्ताक्षर गोली पर हैं या कंटेनर पर।

    अदालत को बताया गया कि कंटेनर पर हस्ताक्षर मौजूद हैं, जबकि गोली पर हस्ताक्षर की स्थिति के बारे में केवल फॉरेंसिक विशेषज्ञ ही निश्चित रूप से बता सकते हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने बहस के लिए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।