हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह को झटका, महिला कोच के यौन उत्पीड़न का मामला ट्रांसफर
हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह को महिला कोच छेड़छाड़ मामले में झटका लगा है। यह मामला अब सीजेएम कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिसकी अगल ...और पढ़ें

हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री पर महिला कोच ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
HighLights
पूर्व मंत्री संदीप सिंह को छेड़छाड़ मामले में बड़ा झटका।
महिला कोच की याचिका पर मामला सीजेएम कोर्ट ट्रांसफर।
न्यायाधीश पर पक्षपात के आरोप, सुनवाई 19 फरवरी को।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। महिला कोच से छेड़छाड़ मामले में हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री व भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान संदीप सिंह को झटका लगा है। अब यह मामला किसी अन्य अदालत में सुना जाएगा। अब यह केस मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी(सीजेएम) की अदालत में चलेगा। सुनवाई की तारीख 19 फरवरी तय की गई है।
कोच की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता समीर सेठी ने बताया कि सोमवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में इस ट्रांसफर आवेदन पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने केस ट्रांसफर करने की अनुमति दे दी।
याचिका में कहा गया था कि यह मामला जज राहुल गर्ग की अदालत में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य के लिए लंबित था, लेकिन पुलिस द्वारा दाखिल चालान (फाइनल रिपोर्ट) देखने के बाद पता चला कि राहुल गर्ग खुद अभियोजन पक्ष के गवाहों की सूची में गवाह नंबर 19 के रूप में दर्ज हैं।
कोच ने तर्क दिया कि जिस अदालत के जज खुद गवाह हों, वहां निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। यह एक गंभीर कानूनी बाधा है और इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसने इस आपत्ति को पहले मौखिक रूप से और फिर लिखित आवेदन के माध्यम से अदालत के सामने रखा था, लेकिन इसके बावजूद जज ने खुद को केस की सुनवाई से अलग नहीं किया और सुनवाई जारी रखी।
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कोच का दावा है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया में स्पष्ट पक्षपात दिखाई देता है। पीड़िता ने याचिका में यह भी कहा कि अदालत ने उसे चालान की पूरी कापी उपलब्ध नहीं कराई। उसने इसकी काॅपी के लिए खर्च उठाने की इच्छा भी जताई थी।
कोच ने आरोप लगाया कि अदालत ने उसे धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज उसके बयान की कापी भी नहीं दी। यह उसका अधिकार है ताकि वह रिकाॅर्ड से मिलान कर सके और अदालत में बयान देने से पहले उसकी सत्यता जांच सके।
बिना बयान देखे गवाही देने का आदेश दिया गया
याचिका में यह भी कहा गया कि अदालत ने पीड़िता को पहले से दर्ज बयान की पुष्टि करने का मौका दिए बिना ही गवाही देने का निर्देश दे दिया। पीड़िता ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया। चालान की काॅपी, धारा 164 के बयान और केस फाइल तक पहुंचने न देना, साथ ही जज का खुद गवाह सूची में होना।
इन सभी कारणों से निष्पक्ष सुनवाई बाधित हो रही थी। जिला एवं सत्र न्यायालय ने पीड़िता की दलीलों को स्वीकार करते हुए केस को सीजेएम कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दे दिया है।