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    पुरानी पेंशन योजना के दायरे में आएंगे कई कर्मचारी, कच्चे कार्यकाल की सेवा भी पेंशन के लिए मान्य; HC का ऐतिहासिक फैसला

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 03:15 PM (IST)

    पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि नियमितीकरण से पहले की अंशकालिक, अस्थायी या संविदा सेवा को भी पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा माना जाएगा। ...और पढ़ें

    पुरानी पेंशन योजना के दायरे में आएंगे कई कर्मचारी (फाइल फोटो)

    पुरानी पेंशन योजना के दायरे में आएंगे कई कर्मचारी (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. नियमितीकरण से पहले की सेवा पेंशन के लिए अर्हकारी मानी जाएगी।

    2. पुरानी पेंशन योजना: कट-ऑफ से पहले भर्ती प्रक्रिया वालों को लाभ।

    3. अंशकालिक, अस्थायी, संविदा कर्मचारियों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत।

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लंबे समय तक अंशकालिक, अस्थायी या संविदा आधार पर लगातार सेवा देने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि नियमितीकरण से पहले की उनकी निर्बाध सेवा को भी पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा (क्वालीफाइंग सर्विस) माना जाएगा।

    अदालत ने कहा कि यदि इस सेवा को जोड़ने पर कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के दायरे में आते हैं तो केवल इस आधार पर उन्हें लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि उनका नियमितीकरण नई पेंशन योजना (एनपीएस) लागू होने के बाद हुआ।

    जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने 95 याचिकाओं के समूह का एक साथ निपटारा करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने याचिकाओं को दो श्रेणियों में विभाजित किया। पहली श्रेणी में वे कर्मचारी थे जिन्हें 1 जनवरी 2006 से पहले अंशकालिक, अस्थायी या संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था, लेकिन उनका नियमितीकरण बाद में हुआ।

    इन कर्मचारियों की मांग थी कि नियमितीकरण से पूर्व की सेवा को भी पेंशन के लिए गिना जाए।दूसरी श्रेणी में वे कर्मचारी शामिल थे जिन्होंने हरियाणा सरकार के 8 मई 2023 के कार्यालय ज्ञापन के आधार पर पुरानी पेंशन योजना का लाभ मांगा था।

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    उनका कहना था कि जिन पदों पर उनकी नियुक्ति हुई, उनके लिए भर्ती प्रक्रिया नई पेंशन योजना लागू होने से पहले शुरू हो चुकी थी, जबकि प्रशासनिक देरी के कारण नियुक्ति बाद में हुईं।राज्य सरकार ने पंजाब सिविल सर्विसेज नियमों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि अंशकालिक सेवा को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा नहीं माना जा सकता।

    हालांकि हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।एक याचिकाकर्ता के मामले का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि उसने 15 फरवरी 2002 से अंशकालिक कर्मचारी के रूप में लगातार बिना किसी व्यवधान के 16 मई 2016 तक सेवा दी।

    अदालत ने कहा, ऐसी परिस्थितियों में इस न्यायालय का विचार है कि यदि केवल इस आधार पर कि प्रारंभिक नियुक्ति अंशकालिक थी, नियमितीकरण से पहले दी गई मूल्यवान सेवा को पेंशन लाभों के लिए विचार से बाहर रखा जाए, तो यह स्पष्ट अन्याय होगा।

    हाई कोर्ट ने अपने फैसले से यह भी स्पष्ट कर दिया कि जिन कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया पुरानी पेंशन योजना की कट-आफ तिथि से पहले शुरू हुई थी, लेकिन प्रशासनिक विलम्ब के कारण उनकी नियुक्ति बाद में हुई, उन्हें भी परिस्थितियों के अनुसार पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने से इंकार नहीं किया जा सकता।