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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 03, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Haryana: महिला ने पहले पति को छोड़ किया था दूसरा विवाह, जब मांगा गुजारा भत्ता तो अदालत ने केस खारिज करते हुए कह दी बड़ी बात

    By Dayanand Sharma Edited By: Monu Kumar Jha
    Updated: Wed, 03 Jan 2024 04:13 PM (GMT+05:30)

    Punjab and Haryana High Court ने तलाक के आदेश को चुनौती देने वाली पत्नी की याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पति को छोड़कर दूसरा विवाह करन ...और पढ़ें

    Chandigarh News: पति को छोड़ किया दूसरा विवाह, पत्नी स्थायी गुजारा भत्ते की हकदार नहीं : हाई कोर्ट
    Chandigarh News: पति को छोड़ किया दूसरा विवाह, पत्नी स्थायी गुजारा भत्ते की हकदार नहीं : हाई कोर्ट

    HighLights

    1. 2008 में सुनाए गए तलाक के फैसले के खिलाफ पत्नी की याचिका खारिज
    2. 2005 में दिया था पहले पति को हलफनामा, स्वीकारी थी दूसरे विवाह की बात
    3. 2007 में तलाक से जुड़ा केस कुरुक्षेत्र की अदालत में दाखिल होने पर जबरन हलफनामे की कही थी बात

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने तलाक के आदेश को चुनौती देने वाली पत्नी की याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि पति को छोड़कर दूसरा विवाह करने वाली पत्नी स्थायी गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है। रेखा व संतोष का विवाह 2003 में अंबाला में हुआ था और आरोप के अनुसार रेखा 31 मई 2004 को घर छोड़ कर चली गई थी।

    इसके बाद संतोष को पता चला कि रेखा ने दूसरा विवाह कर लिया है। इसके बाद रेखा ने 2005 में हलफनामा दिया, जिसमें उसने स्वीकार किया कि उसने दूसरा विवाह कर लिया है और वह अपने सभी गहने व अन्य सामान प्राप्त कर चुकी है।

    तलाक से जुड़ा केस कुरुक्षेत्र की अदालत में किया दाखिल

    इसके बाद संतोष ने तलाक से जुड़ा केस कुरुक्षेत्र की अदालत में दाखिल किया। इस केस में कुरुक्षेत्र की अदालत से नोटिस जारी होने के बाद रेखा हाजिर हुई और दूसरा विवाह नकार दिया। इसके साथ ही आरोप लगाया कि जबरन उससे यह समझौता लिखवाया गया था।

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     जबरन लिया गया था हलफनामा-हाई कोर्ट

    अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद संतोष के हक में फैसला सुनाते हुए तलाक को मंजूरी दे दी थी। इसी फैसले को पत्नी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने कहा कि हलफनामा जबरन लिया गया था। यह दलील याची ने 2007 में तलाक का केस दाखिल होने की बाद दी थी।

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    जबकि 2005 से लेकर तलाक का केस दाखिल होने तक उसने पुलिस को कोई शिकायत नहीं दी। हाई कोर्ट ने तलाक के फैसले को सही करार देते हुए याचिका को खारिज कर दिया।

    वह गुजारे भत्ते की पात्र नहीं-अदालत

    हाई कोर्ट ने कहा कि तलाक के चलते स्थायी गुजारा भत्ता याची के पक्ष में जारी नहीं किया जा सकता, क्योंकि पत्नी ने ही पति को छोड़ा था और दूसरा विवाह किया था। ऐसे में वह गुजारे भत्ते की पात्र नहीं है।

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