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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 29, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    ISSF World Cup 2024: वकालत छोड़ थामी पिस्टल, अब हरियाणा की इस बेटी ने जीता सिल्वर मेडल

    By Jagran News Edited By: Monu Kumar Jha
    Updated: Mon, 29 Jan 2024 01:40 PM (IST)

    ISSF World Cup 2024 वकालत छोड़कर पिस्टल थामने वाली पानीपत की अनुराधा ने काहिरा में आयोजित आइएसएसएफ वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल जीतकर गांवशहर प्रदेश और द ...और पढ़ें

    Panipat News: हरियाणा की बेटी अनुराधा ने जीता सिल्वर मेडल। प्रतीकात्मक फोटो
    Panipat News: हरियाणा की बेटी अनुराधा ने जीता सिल्वर मेडल। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. 2009 में टाइपिस्ट के तौर पर किया था काम शुरू।
    2. एक लड़की की स्टोरी पढ़ हुईं मोटिवेट।
    3. कोच जसबीर ने अभ्यास कराना किया शुरू।
    4. नहीं मानी हार, परिवार का जिम्मा भी उठाया।

    जागरण संवाददाता, पानीपत। वकालत छोड़कर पिस्टल थामने वाली पानीपत की अनुराधा ने काहिरा में आयोजित आइएसएसएफ वर्ल्ड कप में सिल्वर मेडल जीतकर भारत का तिरंगा फहरा दिया है। अनुराधा ने महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में 239.9 स्कोर किया। अनुराधा सोमवार को पानीपत पहुंचेंगी।

    2009 में टाइपिस्ट के तौर पर किया था काम शुरू

    वकील रमेश भारद्वाज ने बताया कि सेक्टर 24 निवासी अनुराधा ने 12 वीं पास करने के बाद उनके पास वर्ष़ 2009 में टाइपिस्ट के तौर पर काम शुरू किया था। जिसके बाद धीरे-धीरे उसने ग्रेजुएशन और वकालत की डिग्री पूरी की। वह जुडिशियल की तैयारी करने लगी।

    एक लड़की की स्टोरी पढ़ हुईं मोटिवेट

    वह एक दिन लाइब्रेरी में अखबार पढ़ रही तो उसे एक आर्टिकल मिला। एक लड़की स्पोर्ट्स कोटे से डीएसपी बन गई। जिसे पढ़ने के बाद अनुराधा का भी खेल की तरफ रूझान बढ़ा। वे अनुराधा को लेकर उझा के पास द्रोणाचार्य एकेडमी में लेकर गए और उसका दाखिला कराया।

    कोच जसबीर ने अभ्यास कराना किया शुरू 

    जहां पर कोच जसबीर ने उन्हें अभ्यास कराना शुरू किया। वकील रमेश ने बताया कि 2019 में द्रोणाचार्य एकेडमी में अनुराधा ने अभ्यास करना शुरू किया था कि कुछ दिनों बाद ही कोरोना काल की वजह लाकडाउन लग गया।

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    अनुराधा ने फिर भी अभ्यास जारी रखा। नेशनल स्तर पर पदक जीतने के बाद 2021 में उसका इंडिया टीम में चयन हुआ। अब उसने पहली बार अंतराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता है।

    नहीं मानी हार, परिवार का जिम्मा भी उठाया

    अनुराधा अपनी चार बहनों और दो भाइयों में दूसरे नंबर पर है। आर्थिक स्थिति कमजोर थी तो बहनों और भाइयों की शिक्षा का जिम्मा भी अनुराधा ने अपने कंधों पर उठाया।

    वकालत के दौरान मेहनत कर उसने परिवार को संभाला। अनुराधा की मां कमलेश और पिता रामेशर खेतीबाड़ी करते है। अनुराधा की करीब डेढ साल पहले सैनी कालोनी निवासी सन्नी से शादी हुई है, जो होमगार्ड है।

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