कागजों में बढ़ा बसों का बेड़ा, तीन साल से रेवाड़ी रोडवेज डिपो में 150 पार नहीं कर पाई संख्या; यात्री परेशान
रेवाड़ी रोडवेज डिपो में बसों की संख्या कागजों में 177 स्वीकृत होने के बावजूद पिछले तीन साल से 150 से अधिक नहीं हो पाई है। इससे यात्रियों को रोजाना परे ...और पढ़ें

तीन साल से 150 पार नहीं कर पाई संख्या। (AI Generated Image)
HighLights
रेवाड़ी डिपो में बसों की संख्या 3 साल से 150 पर स्थिर।
स्वीकृत 177 बसों का बेड़ा कागजों तक ही सीमित।
यात्री, छात्र व कर्मचारी घंटों इंतजार को मजबूर।
जागरण संवाददाता रेवाड़ी। स्थानीय रोडवेज डिपो में बसों की संख्या बढ़ाने का फैसला केवल कागजों तक ही सिमट कर रह गया है। परिवहन विभाग ने करीब पांच साल पहले रेवाड़ी डिपो का बेड़ा 150 से बढ़ाकर 177 बसों का कर दिया था।
लेकिन हकीकत यह है कि पिछले तीन साल से डिपो में बसों की संख्या 150 को पार ही नहीं कर पाई है। नतीजा, आबादी के हिसाब से बसें न बढ़ने से यात्रियों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्थानीय डिपो से फिलहाल 120 रूटों पर बसों का संचालन किया जा रहा है। लेकिन बेड़े में सिर्फ 150 बसें होने से हर रूट पर पर्याप्त फेरे नहीं लग पा रहे। सुबह-शाम पीक आवर्स में बसों में खचाखच भीड़ रहती है। छात्र, कर्मचारी व ग्रामीण यात्री घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं।
कई बार बस न मिलने से लोगों को निजी वाहनों या महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ता है। कब तक डिपो को पूरी बसें मिलेंगी इसका जवाब किसी के पास नहीं है। फिलहाल यात्री कागजी आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच पिस रहे हैं।
फेरे मिस, रूट बंद
बसों व चालक-परिचालकों की कमी के कारण आए दिन रूटों पर फेरे मिस हो जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कई रूट लंबे समय से बंद पड़े हैं। धारूहेड़ा, बावल, कोसली, नाहड़ व खोल क्षेत्र के दर्जनों गांवों में बस सेवा अनियमित है।
खबरें और भी
यात्रियों की लगातार डिमांड के बावजूद नए रूट शुरू नहीं हो पा रहे। विभागीय अधिकारी बसों की कमी का हवाला देकर फाइल आगे नहीं बढ़ा रहे।
पांच साल में नहीं आई नई बस
परिवहन विभाग ने 2021 में रेवाड़ी डिपो की स्वीकृत संख्या 177 कर दी थी। उम्मीद थी कि नए रूटों पर बसें चलेंगी और फेरे बढ़ेंगे। लेकिन कागजी कार्रवाई के बाद धरातल पर एक भी अतिरिक्त बस नहीं आई। पुरानी बसें कंडम होने से बेड़ा 150 के आसपास ही अटका है।
वर्कशाप में खड़ी खराब बसें भी संख्या पूरी नहीं होने दे रहीं। पिछले पांच साल में रेवाड़ी की आबादी व औद्योगिक क्षेत्र तेजी से बढ़ा है। बावल औद्योगिक क्षेत्र, धारूहेड़ा व मानेसर तक रोजाना हजारों श्रमिक व कर्मचारी सफर करते हैं। लेकिन बसों की संख्या जस की तस रहने से भीड़ व धक्का-मुक्की आम बात हो गई है। छात्राओं व महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है।
यूनियन कई बार उठा चुकी है बसों की मांग
रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने कई बार मुख्यालय को ज्ञापन देकर 177 बसों का बेड़ा पूरा करने की मांग कई बार उठाई जा चुकी है। उनका कहना है कि बसें न होने से किलोमीटर लक्ष्य भी पूरा नहीं हो रहा और विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं यात्रियों को अलग से परेशानी उठानी पड़ रही है।
मुख्यालय से नई बसों की डिमांड भेजी गई है। बसें मिलते ही रूटों पर फेरे बढ़ाए जाएंगे व बंद रूट दोबारा शुरू किए जाएंगे। मौजूदा बसों के माध्यम से भी यात्रियों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।
निरंजन कुमार, महाप्रबंधक रोडवेज