Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग में भारत को झटका, परवीन हुड्डा का पदक का सपना टूटा; क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड की साशा से हारीं

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 02:01 PM (IST)

    डेढ़ साल बाद अंतरराष्ट्रीय रिंग में लौटीं परवीन हुड्डा का कॉमनवेल्थ बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पदक जीतने का सपना क्वार्टर फाइनल में ही टूट गया। ...और पढ़ें

    परवीन हुड्डा का पदक का सपना टूटा (फोटो: जागरण)

    परवीन हुड्डा का पदक का सपना टूटा (फोटो: जागरण)

    HighLights

    1. परवीन हुड्डा डेढ़ साल बाद अंतरराष्ट्रीय रिंग में लौटीं।

    2. कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड की साशा से हारीं।

    3. पदक जीतने की उम्मीद पहले ही मुकाबले में समाप्त हो गई।

    जागरण संवाददाता, रोहतक। कॉमनवेल्थ बाक्सिंग चैंपियनशिप में रोहतक जिले के गांव रुड़की की बेटी परवीन हुड्डा का पदक जीतने का सपना पहले ही मुकाबले में टूट गया। करीब डेढ़ वर्ष बाद अंतरराष्ट्रीय रिंग में वापसी करने वाली परवीन को क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड की मुक्केबाज साशा के खिलाफ 3-2 से हार का सामना करना पड़ा।

    इस हार के साथ भारत की ब्रान्ज मेडल की एक बड़ी उम्मीद भी समाप्त हो गई। मुकाबले के पहले डेढ़ मिनट में ही रेफरी को प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को चेतावनी देनी पड़ी। पहले राउंड में परवीन 4-1 से पीछे रहीं।

    वहीं दूसरे राउंड में दोनों के बीच कड़ा मुक़ाबला रहा और रेफरी ने दोनों खिलाड़ियों को चेतावनी जारी की, लेकिन इसके बावजूद परवीन 3-0 से पिछड़ गई। जबकि तीसरे और अंतिम राउंड में परवीन ने वापसी करने का प्रयास किया है, लेकिन प्रतिद्वंदी खिलाड़ी को नाकआउट नहीं कर सकी, जिसके चलते 3-2 के अंतर से हार का सामना करना पड़ा।

    इस हार के साथ परवीन का कामनवेल्थ में पदक जीतने का सपना टूट गया। बता दे कि परवीन करीब डेढ़ वर्ष बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में वापसी कर रही थी और लंबे समय के बाद उन्होंने भारतीय टीम में जगह बनाई और देश के लिए पदक जीतने के इरादे से ग्लासगो पहुंची थी।

    हालांकि उनका सफर पहले ही मुकाबले में समाप्त हो गया। परवीन की मां नीलम ने कहा कि इतने लंबे समय बाद किसी खिलाड़ी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी करना आसान नहीं होता।

    इसके अलावा केवल एक महीने के भीतर भार वर्ग बदलना भी परवीन के लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन बावजूद परवीन ने हार नहीं मानी, भारतीय टीम में जगह बनाई और देश का प्रतिनिधित्व किया। पदक नहीं जीत पाने का दुख जरूर है, लेकिन उसने जिस हिम्मत और संघर्ष के साथ वापसी की, उस पर हमें गर्व है।

    खबरें और भी