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    'कुचु-पुचु इस्तीफा दे दो', संसद में दीपेंद्र हुड्डा ने किया Gen-Z के अनोखे नारों का जिक्र; संशोधन विधेयक को बताया जुमला

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 11:07 AM (IST)

    रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने लोकसभा में 'लोक परीक्षा विधेयक, 2026' पर सरकार को घेरा, कहा कि यह बिल सरकार ने मन से नहीं लाया और युवाओं की आवाज दबाने ...और पढ़ें

    डिजिटल डेस्क, रोहतक। लोकसभा में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' पर रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इससे पहले मैं बिल पर अपनी बात रखू मैं कहना चाहता हूं कि जिन परिस्थितियों में ये बिल आया है वो ये साबित करता है कि ये सरकार ये बिल ना मन से लाई है, ना दिल से लाई है और ना दिमाग से लाई है।

    उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार का मन युवाओं की आवाज दबाने और कुचलने का था। मगर जब पानी नाक पर पहुंच गया और सरकार को समझ आया कि अब सिंहासन डोल रहे हैं।

    उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि ये सरकार नैरेटिव की सरकार है और जब नैरेटिव खराब होने लगा तो सरकार ने इस बिल की घोषणा कर दी। प्रधानमंत्री भी इंस्टाग्राम पर आए, इस्तीफा भी हुआ लेकिन ये बिल मन से नहीं लाए।

    सरकार पर साधा तीखा निशाना

    इस बिल के जितने प्रावधान लाए उसका कोई मतलब नहीं। बिल तो 2004 में भी बना था बस सजा का प्रावधान अब बढ़ा दिया गया है। अगर कानून बनाना ही था, तो पहली शर्त यह होनी चाहिए थी कि अगली बार NEET का पेपर लीक होगा, तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होगा।

    फास्ट ट्रैक कोर्ट बीजेपी का नया जुमला है। देश में फिलहाल 800 फास्ट ट्रैक कोर्ट चल रहे हैं, जिसमें ढाई लाख मामले पेंडिंग हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने 60 दिन में जांच का काम सीबीआई को दिया है वो सीबीआई जिसने 2024 के पेपर लीक के खिलाफ एक सबूत भी नहीं ला पाई। सीबीआई को आपने विपक्ष के खिलाफ लगाया हुआ है, सांसद और विधायक तोड़ने के लिए।

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    देश का युवा अब सरकार किसी से भी वक्त जवाबदेही मांग सकता है। वहां पर नारे चले कि शिक्षा मंत्री तो झांकी है, प्रधानमंत्री अभी बाकी है। ये बिल आपकी हार है और युवाओं की जीत है।  देश के युवा ने अहिंसा का रास्ता लेकर देश के गंभीर मुद्दों को आपके कान तक पहुंचाया। उनके हाथ में पत्थर नहीं बल्कि संविधान था। फोन था, जिससे उन्होंने गीत बनाए, नारे बनाए।

    Gen-Z के नारों का किया जिक्र

    इंकलाब जिंदाबाद का नारा बुलंद करने वाले Gen-Z अपने अनोखे और मुखर अंदाज में इस्तीफा मांगते थे। वो नारा देते थे ‘Vasteguna Huiya’ और प्यार से, खूबसूरत तरीके से इस्तीफा मांगते हुए कहते थे 'कुचु-पुचु इस्तीफा दे दो, आज हमारा जन्मदिन है।'

    हमें गौरव है हमारी अगली पीढ़ी पर। 12 साल की आपकी सरकार में देश का युवा चौराहे पर आ गया और आपकी सरकार का रिपोर्ट कार्ड दे दिया कि कैसे बीजेपी सरकार उनका भविष्य चौपट कर रही है।