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    विश्व धूम्रपान निषेध दिवस: युवाओं को खोखला कर रही स्मोकिंग की लत, PGI रोहतक में रोज आ रहा कैंसर का नया मरीज

    Updated: Sun, 31 May 2026 07:00 AM (IST)

    युवाओं में धूम्रपान और ई-सिगरेट की लत उन्हें कम उम्र में ही कैंसर, फेफड़ों और हृदय रोगों की ओर धकेल रही है। पीजीआई रोहतक में प्रतिदिन फेफड़ों के कैंसर ...और पढ़ें

    युवा हो रहे कैंसर का शिकार। एआई की मदद से फोटो बनाई गई है

    युवा हो रहे कैंसर का शिकार। एआई की मदद से फोटो बनाई गई है

    HighLights

    1. युवाओं में धूम्रपान से कैंसर, हृदय रोग बढ़ रहे।

    2. पीजीआई रोहतक में रोज नया फेफड़ों का कैंसर मरीज।

    3. कम उम्र में भी सांस संबंधी गंभीर बीमारियां फैल रही हैं।

    प्रियंका देशवाल, रोहतक। हाथ में सिगरेट पकड़ना या ई-सिगरेट को आधुनिक लाइफस्टाइल का हिस्सा समझना आज कई युवाओं के लिए सामान्य बात बन चुकी है, लेकिन यहीं शौक धीरे-धीरे ऐसी लत में बदल रहा है, जो युवाओं को कम उम्र में ही कैंसर, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों और हृदय रोगों की ओर धकेल रहा है।

    यहीं कारण है कि पीजीआइ रोहतक में हर दिन फेफड़ों के कैंसर का नया मरीज पहुंच रहा है, जबकि सांस संबंधी गंभीर बीमारियों के करीब 10 नए सहित 50 मरीज पहुंच रहे है। खास बात यह है कि यह बीमारी अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कम उम्र के युवाओं और महिलाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है।

    सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि तंबाकू और निकोटीन की लत अब किशोर और युवा वर्ग में तेजी से फैल रही है। डाक्टरों की माने तो इन दिनों युवा 15 से 20 वर्ष की आयु के युवा धूम्रपान शुरू कर रहे हैं, जिसका परिणाम यह हो रहा है कि फेफड़ों के कैंसर और सांस संबंधी गंभीर बीमारियों के मरीज कम उम्र में सामने आने लगे है।

    वहीं केवल खुद धूम्रपान करना ही नहीं, बल्कि धूम्रपान करने वाले लोगों के साथ रहना भी लोगों के लिए स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक बन रहा है। क्योंकि कई मामले ऐसे भी आ रहे है जो खुद सेवन ना करके ऐसे लोगों के साथ रहते है। यानी धूम्रपान करने वाला व्यक्ति केवल खुद की नहीं, बल्कि अपने आसपास रहने वाले लोगों की सेहत को भी जोखिम में डाल रहे है।

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    फेफड़ों का कैंसर अब युवाओं तक पहुंचा

    पीजीआइ रोहतक में हर माह फेफड़ों के कैंसर के करीब 60 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें लगभग 45 पुरुष और 15 महिला मरीज शामिल हैं। पुरुष मरीजों में करीब 95 प्रतिशत मामलों में कैंसर का प्रमुख कारण तंबाकू और धूम्रपान है।

    वहीं, महिलाओं में करीब आधी महिलाएं स्वयं धूम्रपान करती है, जबकि अन्य महिलाएं ऐसे वातावरण में रहने के कारण प्रभावित हो रही है। जहां लगातार धूम्रपान का धुआं, खराब वायु गुणवत्ता या और चूल्हों से निकलने वाला धुआं भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने वाला बड़ा कारण बन रहा है।

    डॉक्टरों का कहना है कि जहां पहले फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलता था, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे है। यह बदलाव सीधे तौर पर कम उम्र में शुरू हो रही तंबाकू की लत से जुड़ा हुआ माना जा रहा है। अब पीजीआइ में 10 प्रतिशत मरीज 30 से 40 की उम्र के पहुंच रहे है।

    सांस संबंधी बीमारी के भारी संख्या में पहुंच रहे मरीज

    तंबाकू का असर केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा प्रभाव हृदय, श्वसन तंत्र और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर भी पड़ता है। फेफड़ों के कैंसर के अलावा क्रानिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। पीजीआइ में रोजाना लगभग 50 मरीज इस बीमारी के उपचार के लिए पहुंचते है। जिनमें करीब 10 नए मरीज शामिल हैं।

    इनमें करीब 30 प्रतिशत महिलाएं शामिल है। यह बीमारी फेफड़ों में हवा के प्रवाह को बाधित कर देती है, जिससे मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है। गांवों में हुक्के का चलन अभी भी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रहा है। जबकि शहरों में बीड़ी और सिगरेट का सेवन अधिक देखने को मिलता है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में सीओपीडी के अधिकांश मरीजों में हुक्के के सेवन की आदत पाई जाती है, जबकि शहरी क्षेत्रों में बीड़ी और सिगरेट का चलन अधिक देखने को मिलता है। डाक्टरों के अनुसार अधिकांश मरीज ऐसे है। जिनका तंबाकू सेवन से सीधा संबंध रहा है। इस बीमारी के कुछ मरीज 40 वर्ष से कम आयु के भी है।

    पीजीआइ में इन दिनों फेफड़ों के कैंसर व सीओपीडी के मरीजों की संख्या पिछले कुछ वर्षों की तुलना में बढ़ी है। अब कम उम्र में धूम्रपान शुरू करने वाले युवाओं में भी फेफड़ों और सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही है।

    तंबाकू और निकोटीन किसी भी रूप में सुरक्षित नहीं हैं। धूम्रपान करने वाला व्यक्ति केवल खुद को ही नहीं, बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी जोखिम में डालता है।

    क्योंकि दूसरों के धुएं के संपर्क में आना भी फेफड़ों के कैंसर और अन्य बीमारियों का कारण बन सकती है।

    - डा. विपुण, रेस्पिरेटरी मेडिसिन डिपार्टमेंट, पीजीआइ, रोहतक।