बूंद-बूंद पानी को तरस रहा सोनीपत का भौवापुर गांव, TDS 3500 के पार; मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
सोनीपत के भौवापुर गांव में सालों से पेयजल का गंभीर संकट है, जहां ग्रामीणों को पानी के लिए 3-4 किमी चलना पड़ता है। भूजल का टीडीएस स्तर 3500 से अधिक है, ...और पढ़ें

पानी के अकाल से जूझ रहा सोनीपत का भौवापुर गांव। (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी जागरण, राई (सोनीपत)। क्षेत्र का लगभग अढ़ाई हजार आबादी के भौवापुर गांव में पेयजल का अकाल पड़ा हुआ है। इस समस्या से गांव के लोग बरसों से परेशान है। पीने का पानी लाने के लिए उन्हें तीन से चार किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। गांव में भूजल का टीडीएस स्तर 3500 के पार है।
गांव के एक बुजुर्ग का कहना है कि हम हरियाणा में राजस्थान का भूभाग हैं। गांव के निवासी और भी कई तरह की नागरिक सुविधाओं से वंचित हैं।
सालों से पीने योग्य नहीं है पानी
लगभग साढ़े नौ सौ मतदाता संख्या वाले भौवापुर गांव की स्थिति थोड़ी विचित्र है। कई अन्य गांवों की तरह यह राई खंड का हिस्सा है लेकिन यह खरखौदा विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस वजह से प्रशासन से होने वाले कई काम लटके रहते हैं। गांव का पानी सालों से पीने के योग्य नहीं है।
सरकारी ट्यूबवैल से आने वाला पानी भी बेहद खारा है। पेयजल की समस्या से छुटकारा दिलवाने के लिए यहां पर जलघर बनाया गया जिसमें भूमिगत पाइपलाइन के जरिए मोहम्मदाबाद के पास से गुजर रही पश्चिम यमुना नहर से पानी की सप्लाई होनी थी।
अब जलघर भी खंडहर में बदल चुका है, लेकिन जलघर नाम के इस स्थान में एक बूंद भी पानी कभी नहीं पहुंचा।
एकमात्र प्राथमिक विद्यालय पर बरसों से ताला
गांव का एकमात्र प्राथमिक विद्यालय पर बरसों पहले ताला लग चुका है। गांव में कोई लाइब्रेरी भी नहीं है। यह एक ऐसा गांव है जहां पर न तो कोई पार्क है और न कोई व्यायामशाला। मामूली जरूरतों की तरफ प्रशासन की अनदेखी के चलते स्टेडियम जैसे किसी स्थान की उपलब्धता के बारे में सोचना कल्पनातीत ही है।
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गांव में घुसते ही खंडहरनुमा स्कूल भवन दिखता है। गांव का मुख्य रास्ता बुरी तरह से टूटा-फूटा हुआ है। इसे ठीक करने के लिए भेजे गए प्रार्थना पत्रों को प्रशासन द्वारा डस्टबिन में डाल दिया जाता है। गांव में कोई डिस्पेंसरी भी नहीं है।
बीमारी या आपात काल में गांव से बाहर जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा से यह गांव वंचित है। इस गांव को पोस्ट आफिस भी राठधना में है। महिला सशक्तीकरण के इस दौर में गांव में कोई महिला चौपाल भी नहीं है।
क्या बोले लेग
- पानी की बरसों पुरानी की समस्या को हल करने में प्रशासन पूरी तरह से नाकाम है। कई बार ऐसा लगता है कि हम हरियाणा में राजस्थान के किसी मरूस्थलीय इलाके का हिस्सा हैं।
- राजपाल
- हमारे गांव का एकमात्र विद्यालय पर ताला लग चुका है। सरकार को चाहिए कि गांववालों के सहयोगी से शिक्षा का प्रसार कर इस स्कूल को दोबारा से खोले।
- धर्मवीर
- हमारे गांव के विकास की तरफ से प्रशासन आंखें बंद किए बैठा है। यहां सामान्य परिवहन भी नहीं है। खरखौदा विधानसभा क्षेत्र और राई खंड में हमारा गांव सर्वाधिक पिछड़ेपन का शिकार है।
- नरेश
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पेयजल की समस्या से गांव के लोग बरसों से पीड़ित है। मोहम्मदपुर से गांव तक पानी की नई पाइप लाइन भी मेरे कार्यकाल में दबवाई गई है। लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते न तो जलघर को दुरुस्त किया जा रहा है ना ही पानी का कनेक्शन दिया जा रहा है। पेयजल की समस्या दूर किया जाना हमारी पहली मांग है।
पुष्पा देवी, सरपंच भौवापुर