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    गोहाना पश्चिमी बाईपास परियोजना: 11 साल से अटका विकास, किसान मुआवजे पर अड़े

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 06:13 PM (IST)

    गोहाना में पश्चिमी बाईपास परियोजना 11 साल से अटकी हुई है, क्योंकि किसान कलेक्टर रेट से अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं। ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

    सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड

    HighLights

    1. गोहाना पश्चिमी बाईपास परियोजना 11 साल से अटकी।

    2. किसान कलेक्टर रेट से अधिक मुआवजे की मांग कर रहे।

    3. शहर में भारी वाहनों से जाम की समस्या।

    जागरण संवाददाता, गोहाना। सोनीपत के गोहाना में पश्चिमी बाईपास की परियोजना 11 वर्षाें से सिरे नहीं चढ़ पाई है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पहली बार 2015 में गोहाना में पश्चिमी बाईपास बनवाने की घोषणा की थी।

    2019 में सरकार ने बाईपास बनाने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति भी दे दी थी। तब किसानों ने कलेक्टर रेट से कई गुना मुआवजे की मांग की थी, जिससे यह परियाेजना ठंडे बस्ते में चली गई।

    2024 में विधानसभा चुनाव से पहले भी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बाईपास बनवाने की घोषणा की थी। भाजपा की सरकार बनने और गोहाना से डॉ. अरविंद शर्मा के विधायक बनने के बाद फिर से बाईपास की परियोजना को सिरे चढ़ाने का प्रयास शुरू किया गया।

    बाईपास के लिए भूमि अधिग्रहण करने को ई-भूमि पोर्टल पर किसानों से जमीन देने की सहमति के संबंध में आवेदन मांगे गए। लगभग 50 प्रतिशत किसानों ने ही सहमति दी लेकिन मुआवजा कलेक्टर रेट से अधिक मांग रहे हैं।

    इसके चलते अभी तक यह परियोजना अटकी हुई है। बाईपास के अभाव में शहर के अंदर से भारी वाहनों का आवागमन होता है, जिससे बार-बार जाम लगता है।