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    मारुति के खरखौदा प्लांट से हर साल 54 टन कम होगा कार्बन उत्सर्जन, रुकेगी बिजली की बर्बादी

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 03:27 PM (IST)

    मारुति सुजुकी ने खरखौदा प्लांट में 1 MWH बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित किया है, जिससे सालाना 54 टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा। यह पहल सौर ऊर्जा के ...और पढ़ें

    खरखौदा स्थित मारुति सुजुकी के प्लांट में स्थापित किया गया एनर्जी स्टोरेज सिस्टम। सौ. मारुति

    खरखौदा स्थित मारुति सुजुकी के प्लांट में स्थापित किया गया एनर्जी स्टोरेज सिस्टम। सौ. मारुति

    HighLights

    1. खरखौदा प्लांट में 1 MWH बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम शुरू।

    2. सालाना 54 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में सहायक।

    3. सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग, बिजली की बर्बादी रुकेगी।

    जागरण संवाददाता, खरखौदा (सोनीपत)। सोनीपक के खरखौदा में ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की दिशा में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने खरखौदा स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में 1 मेगावाट आवर (एमडब्ल्यूएच) क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) स्थापित किया है।

    मारुति सुजुकी के इस प्लांट से अब हर वर्ष करीब 54 टन कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन कम होगा। कंपनी के अनुसार, यह पहल ग्रीन एनर्जी के बेहतर उपयोग के साथ पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    बिजली का नहीं हो पाता था पूरा उपयोग 

    वर्ष 2025 में कंपनी ने खरखौदा प्लांट में 20 मेगावाट पीक (एमडब्ल्यूपी) क्षमता का सोलर पावर प्लांट स्थापित किया था, लेकिन छुट्टी के दिनों में उत्पादन बंद रहने के कारण सोलर प्लांट से बनने वाली अतिरिक्त बिजली का पूरा उपयोग नहीं हो पाता था। अब बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम इस अतिरिक्त बिजली को संग्रहित करेगा और आवश्यकता के समय उत्पादन कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।

    इससे न केवल सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग संभव होगा, बल्कि पारंपरिक बिजली पर निर्भरता घटने से कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। कंपनी ने इसे फिलहाल पायलट परियोजना के रूप में प्लांट के आंतरिक बिजली वितरण नेटवर्क से जोड़ा है।

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    मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ हिसाशी ताकेउचि ने कहा कि कंपनी भारत में आत्मनिर्भर और स्वच्छ ऊर्जा व्यवस्था विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही है।

    उन्होंने बताया कि लगभग 15 वर्ष की लाइफ साइकिल वाला यह बैटरी सिस्टम हर वर्ष करीब 54 टन कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन कम करने में सहायक होगा।

    उन्होंने कहा कि भविष्य में उत्पादन बढ़ने के बावजूद कंपनी स्कोप-1 और स्कोप-2 श्रेणी के कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य पर काम करती रहेगी।

    कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2030-31 तक इन उत्सर्जनों में 42 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में यह पहल खरखौदा प्लांट को पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक इकाई के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

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    इसलिए अहम है यह पहल

    • हर साल लगभग 54 टन कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में होगी कमी।
    • सोलर प्लांट की अतिरिक्त बिजली अब होगी उपयोग।
    • बिजली की बर्बादी रुकेगी और ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी।
    • वर्ष 2030-31 तक स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 42 प्रतिशत कमी का लक्ष्य।

    परियोजना की खास बातें

    • खरखौदा प्लांट में 1 एमडब्ल्यूएच क्षमता का बीईएसएस शुरू।
    • वर्ष 2025 में लगाया गया था 20 एमडब्ल्यूपी सोलर पावर प्लांट।
    • आंतरिक बिजली वितरण नेटवर्क से पायलट आधार पर जोड़ा गया।