विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सोनीपत में खेत में गए अफसर-कर्मचारियों पर ततैयों का हमला, अपनी जान बचाकर भागे तहसीलदार; पटवारी घायल

Published: Fri, 28 Aug 2026 10:10 PM (IST)

सोनीपत में डिजिटल क्रॉप सर्वे के दौरान अधिकारियों को ततैयों के हमले और चोटों का सामना करना पड़ा, साथ ही ...और पढ़ें

सोनीपत में ततैयों ने सर्वे करने के अधिकारियों-कर्मचारियों को दौड़ाया। फोटो: वीडियो ग्रैब

सोनीपत में ततैयों ने सर्वे करने के अधिकारियों-कर्मचारियों को दौड़ाया। फोटो: वीडियो ग्रैब

HighLights

  1. सोनीपत डीसीएस सर्वे में अधिकारियों पर ततैयों का हमला

  2. खेत में नुकीली वस्तु चुभने से पटवारी हुए चोटिल

  3. डिजिटल क्रॉप सर्वे ऐप में तकनीकी खामियां और सुरक्षा चिंताएं

जागरण संवाददाता, सोनीपत। हरियाणा सरकार द्वारा चलाए जा रहे डिजिटल क्राप सर्वे (डीसीएस) के तहत सोनीपत के गांवों में शुक्रवार को प्रशासनिक टीमें और पटवारी फील्ड परीक्षण के लिए पहुंचे।

गन्नौर तहसील के गांव बेगा में जब अंडर ट्रेनी तहसीलदार देवेंद्र और पटवारी सुरेंद्र सर्वे करने खेत के अंदर गए तो ततैयों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया।। ततैयों के डर से अधिकारी भाग खड़े हुए और खेत से बाहर निकलकर राहत की सांस ली।

भागते समय एक पटवारी के पैर में नुकीली वस्तु चुभने वे वह चोटिल हो गए। इसके अलावा भी अधिकारियों को सर्वे के दौरान भारी व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

मुख्यालय के मिले सख्त निर्देशों के अनुसार पटवारियों को खेत के वास्तविक रकबे के लगभग 20 मीटर अंदर जाकर फोटो प्वाइंट से डिजिटल डेटा और तस्वीरें अपलोड करनी हैं।

पटवारियों ने इसे अव्यवहारिक बताते हुए इसमें आने वाली दिक्कतों का हवाला दिया था। पटवारियों ने कहा था कि पानी से भरे खेतों, गन्ने, ज्वार व बाजार की ऊंची फसलों के अंदर जाकर सर्वे करना संभव नहीं है।

शुक्रवार को पटवारियों के साथ खेतों में पहुंचे अधिकारियों ने वास्तविक स्थिति जांची। इस दौरान सामने आया कि इस व्यवस्था में पटवारियों व प्रशासनिक अधिकारियों के सामने सुरक्षा और तकनीक से जुड़ी कई गंभीर चुनौतियां हैं।

कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा रहा सबसे प्रमुख

गोहाना के गांव जौली में सर्वे के दौरान पटवारी के पैर में नुकीली वस्तु चुभने से वे चोटिल हो गए। जबकि एक अन्य स्थान पर नए पटवारी विष्णु भी चोटिल हुए।

जलभराव वाले धान के खेतों, गन्ने और बाजरे की खड़ी फसलों के बीच सांप और जहरीले जीवों का खतरा लगातार बना हुआ है। कांटेदार झाड़ियों के कारण निर्धारित फोटो प्वाॅइंट तक पहुंचना लगभग असंभव साबित हो रहा है।

एप की तकनीकी खामियां और व्यावहारिक रुकावटें

गांव जुआं में किए गए फील्ड परीक्षण में सामने आया कि एक खसरे का सर्वे पूरा करने में 5 से 10 मिनट का समय लग रहा है। डीसीएस एप की सबसे बड़ी खामी यह है कि एक ही खसरे में यदि एक से अधिक फसलें बोई गई हैं, तो केवल फोटो प्वाॅइंट पर मौजूद फसल ही दर्ज होती है, दूसरी फसल जोड़ने का कोई विकल्प नहीं है।

इसके अतिरिक्त, एप में फसल की सटीक किस्म (जैसे बासमती या गैर-बासमती) दर्ज करने और बुआई की सही तारीख बताने में पटवारियों को परेशानी आ रही है, क्योंकि इसका कोई लिखित रिकार्ड पटवारी के पास पहले से उपलब्ध नहीं होता।

कहां किसने किया सर्वे?

  • गांव जुआं में पटवारी दलबीर राणा व तहसीलदार कीर्ति, नायब तहसीलदार सोमेश वशिष्ठ ने सर्वे किया।
  • गांव बेगा में अंडर ट्रेनी तहसीलदार देवेंद्र, पटवारी सुरेंद्र व नीतू ने सर्वे किया।
  • गांव जौली में कानूनगो संदीप, नायब तहसीलदार हेमंत व पटवारी अंकित ने सर्वे किया।
  • गांव पलड़ी कलां में नायब तहसीलदार इरफान अली व पटवारी प्रमोद ने सर्वे किया।
  • गांव कंवाली में नायब तहसीलदार अचिन, कानूनगो धर्मबीर व अनिल और पटवारी अनिल मोर ने सर्वे किया।

पटवारियों की हड़ताल और भविष्य की अनिश्चितता

द रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगाे एसोसिएशन के बैनर तले प्रदेश भर में पटवारी और कानूनगो 20 अगस्त से अव्यवहारिक नियमों और पोर्टल में तकनीकी खामियों के विरोध में धरने पर हैं।

उनका तर्क है कि बिना बुनियादी सुरक्षा और एप में सुधार किए खेतों के बीच जाकर सर्वे करना जान जोखिम में डालने जैसा है। एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव सन्नी दहिया ने बताया कि तहसीलदार द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी उपायुक्त को भेज दी गई है।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन व्यावहारिक समस्याओं को दूर करता है या सर्वे यूं ही अटका रहता है।

यह भी पढ़ें- सोनीपत में बिजली फॉल्ट ठीक करने चढ़ा था अप्रेंटिस, करंट लगा तो बचाने पहुंचे किसान की भी मौत; झुलस गए शरीर

यह भी पढ़ें- VIDEO: 'कान खोलकर सुन ले, मैं वेस्ट यूपी से हूं और सोनीपत में रहता हूं...' हत्या के बाद सिंगर अंकित बालियान के वीडियो वायरल