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    संवेदनहीनता की हद: 3 बेटियों को पढ़ा-लिखाकर बनाया टीचर, पिता के अंतिम संस्कार में आने के बजाय भेजे 5100 रुपये 

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 09:12 AM (IST)

    सोनपीत से बदलते रिश्तों का दर्दनाक आईना सामने आया है यहां तीन बेटियों ने पिता के अंतिम संस्कार में आने की बजाय ऑनलाइन 5100 रुपये भेज दिए। डेढ़ साल पहल ...और पढ़ें

    सेक्टर-15 स्थित शिव मुक्ति धाम में शिवचरण गुप्ता की चिता को अग्नि देते समाज कल्याणस समिति के सदस्य व वीडियो कॉल पर जुड़ी उनकी बेटी। सौ. समिति

    सेक्टर-15 स्थित शिव मुक्ति धाम में शिवचरण गुप्ता की चिता को अग्नि देते समाज कल्याणस समिति के सदस्य व वीडियो कॉल पर जुड़ी उनकी बेटी। सौ. समिति

    HighLights

    1. एक बेटी नेपाल, दूसरी मुंबई व तीसरी आजमगढ़ में हैं सेटल

    2. पिता निधन पर दिखाई बेरुखी, एक बेटी वीडियो कॉल से जुड़ी

    3. पिता के अंतिम संस्कार में आने की बजाय भेजे पैसे, समाजसेवियों ने दिया कंधा

    जागरण संवाददाता, सोनीपत। अपने समय के बड़े कपड़ा कारोबारी रहे गांव ककरोई के शिवचरण गुप्ता वृद्धाश्रम में रहकर कई साल गुमनामी की जिंदगी बिताकर दुनिया से विदा हो गए। उनके अंतिम संस्कार में उनकी तीन शिक्षक बेटियों की संवेदनहीनता ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया।

    नेत्रदान से दो लोगों की जिंदगी रोशन करने वाले 71 वर्षीय बुजुर्ग का मंगलवार को निधन हो गया। आनंदाश्रम के संचालक ने नेपाल, मुंबई व उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में रहने वाली उनकी तीन शिक्षक बेटियों को सूचित किया, लेकिन तीनों ने अंतिम संस्कार में आने से इनकार कर दिया।

    NCR Khabar (47)

    समाजसेवियों ने शिवचरण गुप्ता का अंतिम संस्कार किया। 

    एक नेपाल, दूसरी मुंबई व तीसरी आजमगढ़ में हैं सेटल

    मुंबई में रहने वाली बेटी ने 5100 रुपये भेजकर अंतिम संस्कार करने को कहा। वहीं नेपाल में रहने वाली बेटी ने वीडियो ने अंतिम संस्कार देखा, जबकि दो अन्य इतना की जरूरी नहीं समझा। बेटों व बेटियों मानने वाले आदर्श समाज के लोग तीन बेटियों की बेरुखी पर बच्चों को नैतिकता व संस्कार देने की सीख देते नजर आए, ताकि बच्चे बुढ़ापे में मां-बाप का सहारा बन सकें व उनके अंतिम समय में काम आ सकें।

    करीब 60 साल पहले मुंबई में करोड़ों रुपये का कपड़ा कारोबार सेट करने वाले मूलरूप से गांव ककरोई के शिवचरण गुप्ता रहने वाले थे। उनकी तीन बेटियां हैं। शिवचरण गुप्ता ने तीनों को पढ़ा-लिखाकर शिक्षक बनाया। बड़ी बेटी नेपाल, मंझली मुंबई और छोटी आजमगढ़ में पतियों व बच्चों के साथ सेटल हैं। घाटा होने से कई साल पहले कारोबार बंद हो गया।

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    तीनों बेटियों ने उनकी सुध नहीं ली। बड़ी बेटी के पास वे कुछ दिन रहे भी, लेकिन तीन साल पहले पत्नी के साथ सोनीपत के वद्धाश्रम में आ गए। डेढ़ साल पहले पत्नी के निधन पर उनकी एक बेटी सोनीपत नहीं आई। वहीं अब मंगलवार को शिवचरण गुप्ता का भी निधन हो गया। आनंदाश्रम के संचालक आनंद कुमार ने उनकी तीन बेटियों को सूचित किया, लेकिन बेटियां बोलीं कि वे नहीं आ सकती।

    पिता के अंतिम संस्कार में आने की बजाय भेजे पैसे

    नेपाल में रहने वाली बेटी ने पिता के अंतिम संस्कार के खर्च के लिए 5100 रुपये ट्रांसफर करते हुए वीडियो कॉल से पिता का अंतिम संस्कार देखा। समाज कल्याण समिति के संचालक आनंद कुमार से बेटी ने कहा कि अंतिम संस्कार के सभी वीडियो उन्हें भेज दें।

    अंतिम संस्कार के बाद समिति के सदस्यों ने तीनों बेटियों इस संवेदनहीनता की निंदा करते हुए बच्चों को नैतिकता व संस्कारों का पाठ पढ़ाने की अपील की। वहीं लोग बुजुर्ग शिवचरण गुप्ता की प्रशंसा करते नहीं थक रहे, क्योंकि उन्होंने अपनी मौत से पहले ही नेत्रदान कर दिया था।

    मंगनलवार को उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए नेत्रदान कराए गए। दृष्टि संस्था से जुड़े नरेंद्र भुटानी ने बताया कि शिवचरण गुप्ता भले ही आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखें दो दृष्टिहीनों की जिंदगी रोशन कर गईं।

    इसे लेकर समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष आनंद कुमार ने कहा कि जीवन पर्यन्त करोड़ों रुपये कमाने का कोई लाभ नहीं, बच्चों को संस्कार देकर सफल बनाएं, ताकि बुढ़ापे व अंतिम समय में सहारा बन सकें।

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