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    सोनीपत में ज्ञान का पहिया: 'कल्पना चावला पैनोरमा' मोबाइल साइंस वैन बन रही विद्यार्थियों के लिए वरदान!

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 05:00 PM (IST)

    सोनीपत में कल्पना चावला पैनोरमा मोबाइल साइंस वैन 1 जुलाई से स्कूलों में विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सरल प्रयोगों से समझा रही है। ...और पढ़ें

    साइंस वैन पहुंची स्कूल। जागरण

    साइंस वैन पहुंची स्कूल। जागरण

    HighLights

    1. मोबाइल साइंस वैन 1 जुलाई से सोनीपत में सक्रिय।

    2. जटिल विज्ञान सिद्धांतों को सरल प्रयोगों से समझा रही।

    3. ग्रामीण छात्रों को आधुनिक वैज्ञानिक सुविधाएं मिल रही।

    जागरण संवाददाता, सोनीपत : जिले में कल्पना चावला पैनोरमा मोबाइल साइंस वैन का संचालन एक जुलाई से किया जा रहा है। यह अनूठी मोबाइल साइंस वैन जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों को विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को सरल और रोचक प्रयोगों के माध्यम से समझा रही है।

    यह विशेष विज्ञान वैन एक जुलाई से अपनी यात्रा पर है और 11 अगस्त तक जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में डेरा डालेगी। लगभग डेढ़ महीने की इस लंबी और व्यापक अवधि में यह वैन विद्यार्थियों के लिए विज्ञान का चलता-फिरता और जीवंत केंद्र साबित हो रही है।

    यात्रा के दौरान अब तक लगभग 21 स्कूलों को इस कार्यक्रम के तहत सफलतापूर्वक कवर किया जा चुका है। कल्पना चावला पैनोरमा मोबाइल साइंस वैन एक विद्यालय में दो दिनों तक निरंतर रुकती है, ताकि वहां के प्रत्येक विद्यार्थी को सभी विज्ञान माडलों और प्रयोगों को देखने, समझने और स्वयं अपने हाथों से करके सीखने का भरपूर अवसर मिल सके।

    पैनोरमा के भीतर अंतरिक्ष विज्ञान, भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान से जुड़ी गतिविधियां, कार्यशील माडल और जीवंत प्रदर्शन उपलब्ध हैं। इन आकर्षक माडलों को देखकर और उनके प्रयोग करके बच्चे विज्ञान के प्रति खासे आकर्षित हो रहे हैं और उनके मन में छुपी जिज्ञासाएं शांत हो रही हैं।

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    जिला विज्ञान विशेषज्ञ सुरेंद्र सिंह ने बताया कि यह वेन अब गोहाना ब्लाक के सफल और प्रेरणादायक पड़ाव के बाद अब इस वैन ने सोनीपत ब्लाक के विद्यालयों का रुख किया है।

    इसके पश्चात निर्धारित रूट और समय-सारणी के अनुसार यह वैन बड़वासनी, भठगांव, गढ़ी ब्राह्मणान, बड़ौली और मुरथल क्षेत्रों के स्कूलों तक पहुंचेगी। ग्रामीण अंचल और दूरदराज के विद्यार्थियों के लिए यह किसी बड़े वरदान से कम नहीं है, क्योंकि उन्हें अपने ही स्कूल परिसर में महानगरों जैसी आधुनिक वैज्ञानिक सुविधाएं और माडल देखने को मिल रहे हैं।

    शिक्षकों का भी मानना है कि इस प्रकार के प्रायोगिक कार्यक्रमों से बच्चों में शुरुआती स्तर से ही विज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है और भविष्य में वे अनुसंधान, प्रौद्योगिकी तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं। जिला प्रशासन का यह प्रयास जिले के नौनिहालों के भविष्य को एक नई दिशा दे रहा है।