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    सोनीपत में घर का कचरा बाहर करने के लिए देना होगा शुल्क, हाउस टैक्स के साथ वसूलेगा निगम

    Updated: Mon, 27 Apr 2026 02:55 PM (GMT+05:30)

    सोनीपत नगर निगम अब हाउस टैक्स के साथ कचरा उठान शुल्क वसूलेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और राजस्व संग्रह बेहतर होगा। इस नई व्यवस्था में कचरा उठान की निग ...और पढ़ें

    कचरा उठाकर ले जाते कंपनी की ओर से लगाए गए वाहन। जागरण

    कचरा उठाकर ले जाते कंपनी की ओर से लगाए गए वाहन। जागरण

    HighLights

    1. हाउस टैक्स के साथ ही कचरे का बिल जोड़ने की कवायद शुरू

    2. वहीं, सोनीपत में भी लागू होगी ऑनलाइन कचरा उठान निगरानी प्रणाली

    3. कंपनी के सभी वाहन जीपीएस से लैस होंगे, घरों पर लगेंगी एफआरआइडी

    जागरण संवाददाता, सोनीपत। अपने घर का कचरा बाहर करने के लिए अब शुल्क देना ही होगा। कचरा उठान का शुल्क अब निगम ही वसूलेगा। पहले यह काम एजेंसी करती थी, लेकिन अब जल्द ही शहर में नगर निगम हाउस टैक्स के साथ कचरे का बिल भी जोड़कर भेजेगा। इसको लेकर मुख्यालय स्तर पर पत्राचार हो चुका है।

    2017 में हुआ था एक समझौता

    शुल्क नहीं दिया तो कचरा आप नगर निगम की गाड़ी में नहीं डाल सकेंगे। यहीं, नहीं यदि पैसे बचाने की कोशिश में यदि इधर-उधर कचरा डालते हुए नजर आए तो जुर्माना भी देना होगा। नगर निगम की ओर से जेबीएम समूह के मध्य साल 2017 में एक समझौता हुआ था, जिसके बाद जहां एजेंसी को डोर टू डोर कचरा लेने का काम शुरू हुआ।

    मौजूदा समय में सोनीपत एक लाख पांच हजार भवनों से कचरा लिया जाता है, जिसमें 80 हजार घर शामिल हैं। इसमें शहर के साथ निगम में शामिल गांव भी हैं। कंपनी को भवन के हिसाब से हर माह 25 लाख रुपये से ज्यादा का राजस्व मिलना चाहिए था, लेकिन हाल में स्थिति यह है कि महज कुछ लाख तक ही समिति है। निगम में ज्यादातर लोग इसलिए भी कचरा उठान चार्ज नहीं देते कि उन्हें लगता है कि निगम की गाड़ी है, जबकि हकीकत में यह पीपीपी मॉडल पर आधारित कार्य है।

    176 करोड़ रुपये के करार में गारबेज चार्ज अतिरिक्त शामिल है। कंपनी के सामने ये भी आया है कि कई जगह से कचरा उठान के रुपये कोई अन्य भी वसूल ले जाता है। निगम की पहल से इसमें भी पारदर्शिता आएगी। फिलहाल यह न्यूनतम 50 रुपये शुल्क तय है। इसके अलावा घर या प्रतिष्ठान के क्षेत्रफल के हिसाब से भी तय है।

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    कलेक्शन के दबाव में चालक भी कर चुके हड़ताल

    घर-घर से कचरा उठान के भुगतान की कलेक्शन को लेकर एजेंसी और चालकों के बीच भी विवाद हो गया था, जिसके बाद नवंबर, 2025 में घरों से कचरा उठान चार्ज के रूप में रुपये एकत्रित करने का दबाव बनाने के विरोध में सफाई एजेंसी के कूड़ा लिफ्टिंग गाड़ी के चालकों ने नगर निगम में प्रदर्शन भी किया था।

    वह कई दिन तक हड़ताल पर भी रहे थे। उनका आरोप था कि ठेकेदार उन पर घर-घर से पर्ची काटकर हर महीने 20-20 हजार रुपये एकत्रित करने का दबाव बना रहा है। लोग भी इसका विरोध करते है, जिससे काम करने में दिक्कत आती है।

    आरएफआइडी तकनीक से होगी कचरा उठान की निगरानी

    शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआइडी) तकनीक लागू की जाएगी। यह व्यवस्था कुछ हद तक फास्टैग जैसी है, जहां वाहन टोल प्लाजा से गुजरते ही अपने आप पहचान हो जाती है और भुगतान कट जाता है। ठीक उसी तरह आरएफआइडी सिस्टम के जरिए हर घर की पहचान होगी और कूड़ा उठाने की स्थिति दर्ज होगी।

    गाड़ी में लगा रीडर उस टैग को स्कैन कर लेगा और तुरंत यह जानकारी रिकार्ड हो जाएगी कि संबंधित घर से कूड़ा उठाया गया है। यदि किसी घर का कूड़ा नहीं उठाया जाता है तो उसका डाटा भी सिस्टम में दर्ज रहेगा, जिससे कार्रवाई की जा सकेगी। साथ ही सारे वाहन भी जीपीएस से लैस होंगे, ताकि उनकी लोकेशन भी ट्रैक की जा सकें। इसकी निगरानी सेक्टर-7 में स्थापित कंट्रोल रूम से होगी।

    नंबर गेम 

    • 80 वाहन लगाए है जेबीएम कंपनी ने शहर से कचरा उठाने को
    • 200 टन कचरा निकलता है प्रतिदिन सोनीपत निगम क्षेत्र से
    • 50 रुपये न्यूनतम तय होगा कचरा उठान का महीने का बिल
    • 4.27 लाख जनसंख्या है नगर निगम क्षेत्र की
    • 4.75 किलो कचरा निकालता है औसतन प्रति व्यक्ति

     

    मुख्यालय स्तर पर अधिकारियों के साथ पत्राचार किया गया है, ताकि यह व्यवस्था जल्द से जल्द लागू हो सकें। इससे बिल भरने की प्रक्रिया में पारदर्शिता भी आएगी। वहीं, कचरा उठान की आनलाइन निगरानी भी की जाएगी, जिससे कचरा उठान का कार्य बेहतर तरीके से हो सकेंगा।


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    - हर्षित कुमार, आयुक्त, नगर निगम