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    यमुनानगर में सीवरेज और फैक्ट्रियों का जहरीला पानी बर्बाद कर रहा ममीदी-ईशोपुर के खेत, सड़ रही फसलें

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 02:35 PM (IST)

    यमुनानगर में शहर के सीवरेज और औद्योगिक इकाइयों से निकल रहा रासायनिक पानी ममीदी व ईशोपुर के खेतों को बर्बाद कर रहा है। ...और पढ़ें

    सीवरेज और फैक्ट्रियों का जहरीला पानी बर्बाद कर रहा ममीदी-ईशोपुर के खेत (फाइल फोटो)

    सीवरेज और फैक्ट्रियों का जहरीला पानी बर्बाद कर रहा ममीदी-ईशोपुर के खेत (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. यमुनानगर में सीवरेज और औद्योगिक इकाइयों का पानी खेतों में।

    2. रासायनिक पानी से सैकड़ों एकड़ फसलें बर्बाद, भूमि की उर्वरता घटी।

    3. दो साल से किसान समाधान की मांग कर रहे, अधिकारी उदासीन।

    जागरण संवाददाता, यमुनानगर। शहर के सीवरेज व औद्योगिक इकाइयों से निकल रहा केमिकल युक्त पानी ममीदी, ईशोपुर व आसपास के ग्रामीणों के लिए नासूर बन गया है। नाला खेतों के बीचोबीच बह रहा और अकसर ओवरफ्लो होकर खेतों की ओर रुख कर लेता है।

    हालांकि पीड़ित किसान दो साल से समस्या के समाधान की मांग करते आ रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर सीएम विंडो तक शिकायत दर्ज करवा चुके हैं। लेकिन स्थिति ज्यों कि त्यों है।

    निगम अधिकारियों की कार्रवाई केवल दौरा करने तक सीमित रह गई है। किसानों के मुताबिक मानसून सीजन में हर साल सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है। निगम अधिकारी आज तक इस नाले को एसटीपी की ओर डाईवर्ट नहीं करवा पाए।

    35 एकड़ से होकर बह रहा नाला

    किसान जयदत्त त्यागी, अनिरुद्ध त्यागी, अश्चनी, संजीव, अक्षय, मोनू, राज, पवन, सुरेंद्र व शिव दयाल ने बताया कि शहर के सीवरेज व औद्योगिक इकाइयों से निकल रहा केमिकल युक्त पानी को समेटते हुए नाला जोड़ियो गुरुद्वारा के पास से होते हुए खेतों की ओर जा रहा है।

    यह नाला करीब 35 एकड़ से होकर आगे डिच ड्रेन में गिर रहा है। नाला कच्चा होने के कारण अकसर टूट जाता है। वर्षा होने पर समस्या और भी गंभीर बन जाता है। यह नाला ओवरफ्लो होकर बहता है। यदि इस नाले को जम्मू कालोनी स्थित एसटीपी की ओर डाइवर्ट कर दिया जाए तो उनकी समस्या का समाधान हो सकता है।

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    घट रहा उत्पादन

    पीड़ित किसानों के मुताबिक नगर निगम की लापरवाही के कारण वर्षों से सीवरेज का गंदा पानी उनकी कृषि भूमि में गिर रहा है। जिसके कारण खेतों में लंबे समय तक जलभराव बना रहता है, जिससे फसलें सड़ जाती हैं और भूमि की उर्वरता लगातार कम होती जा रही है।

    खेती की लागत बढ़ रही है, जबकि उत्पादन साल-दर-साल घटता जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री विंडो पर कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं। विभिन्न विभागों ने जांच की, अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और नगर निगम ने तीन माह के भीतर स्थायी समाधान का लिखित आश्वासन भी दिया था।

    लेकिन आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। हर बार केवल फाइलें चलती हैं। निरीक्षण होते हैं और वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। कमिश्नर महाबीर प्रसाद ने कहा कि यह मामला मेरी जानकारी में नहीं है। इस संबंध में अधिकारियों से बात करेंगे। समस्या का समाधान जल्द करवा दिया जाएगा।