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    हरियाणा: यमुनानगर में नालों की सफाई पर करोड़ों खर्च, फिर भी गंदगी और जलभराव से लोग बेहाल

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 02:57 PM (IST)

    यमुनानगर में सवा करोड़ के बजट और 100 कर्मचारियों के बावजूद नाले कचरे व गाद से अटे पड़े हैं, जिससे बाहरी कॉलोनियों में गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। ...और पढ़ें

    हरियाणा: यमुनानगर में नालों की सफाई पर करोड़ों खर्च (नगर निगम कार्यालय)

    हरियाणा: यमुनानगर में नालों की सफाई पर करोड़ों खर्च (नगर निगम कार्यालय)

    HighLights

    1. सवा करोड़ बजट, 100 कर्मचारी; फिर भी नाले गंदे।

    2. बाहरी कॉलोनियों में गंदा पानी, जलभराव से लोग परेशान।

    3. निगम के सफाई दावों की खुली पोल, हकीकत चिंताजनक।

    जागरण संवाददाता, यमुनानगर। मानसून के बीच शहर में नालों की सफाई को लेकर नगर निगम और ठेका एजेंसियों के दावों की हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। निगम प्रशासन भले ही नियमित निगरानी और सफाई कार्य का दावा कर रहा हो। लेकिन शहर की आउटर कालोनियों में हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

    नाले कचरे और गाद से अटे पड़े हैं। गंदा पानी गलियों में बहने से लोगों काे भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। नगर निगम ने शहर को तीन जोन में बांटकर नालों की सफाई का जिम्मा दो एजेंसियों को सौंप रखा है।

    टेंडर के अनुसार वार्ड नंबर एक से आठ तक करीब 16 लाख रुपये, वार्ड नंबर नौ से 14 तक लगभग 31 लाख रुपये तथा वार्ड नंबर 15 से 22 तक करीब 27 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। इसके अलावा मुख्य नालों के लिए करीब 50 लाख रुपये का बजट है। करीब 100 कर्मचारियों के सफाई कार्य में लगे होने का दावा भी किया जा रहा है।

    वार्ड-12 में दावों की हकीकत आई सामने

    दैनिक जागरण की पड़ताल में वार्ड नंबर-12 में नालों की सफाई व्यवस्था अच्छी नहीं मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि नालों की सफाई के लिए आज तक कोई कर्मचारी क्षेत्र में नहीं आया।

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    जबकि निगम की ओर से सफाई का एक पूरा राउंड होने का दावा किया जा रहा है। नालियां पालीथिन, कचरे और गाद से भरी हुई हैं। कई स्थानों पर गंदा पानी ओवरफ्लो होकर गलियों में बह रहा है। डेयरियों से निकलने वाला गोबर भी नालियों में बहाए जाने से स्थिति और गंभीर हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आउटर कॉलोनियों के अधिकांश क्षेत्रों में यही हालात हैं।

    मुख्य नालों पर ज्यादा ध्यान

    नगर निगम का फोकस शहर के बड़े नालों की सफाई पर अधिक दिखाई दे रहा है। प्रकाश चौक से डिच ड्रेन तक जाने वाला नाला, रेलवे वर्कशाप से जोड़िया नाका होते हुए डिच ड्रेन में मिलने वाला नाला तथा भारत स्टार्च मिल से पुराना हमीदा होकर डिच ड्रेन तक पहुंचने वाले नाले की नियमित सफाई की जा रही है। ये सभी नाले डिच ड्रेन के माध्यम से पश्चिमी यमुना नहर के रास्ते करनाल जिले की ओर निकलते हैं। इसके विपरीत कालोनियों के छोटे नालों और नालियों की सफाई को लेकर लोगों में नाराजगी है।

    हर बारिश में डूब जाते हैं कई इलाके

    ट्विन सिटी के कई इलाके हर वर्ष बारिश के दौरान जलभराव की चपेट में आ जाते हैं। जगाधरी में गौरी शंकर कालोनी मंदिर क्षेत्र, देवी भवन बाजार, श्मशान घाट रोड, सिविल लाइन, गांधीधाम तथा मटका चौक से बर्तन बाजार तक का क्षेत्र अक्सर पानी में डूब जाता है।

    वहीं यमुनानगर में आजाद नगर, बढ़ी माजरा, शक्ति नगर, प्रोफेसर कालोनी, स्वामी विवेकानंद स्कूल के आसपास का इलाका और एफसीआई गोदाम के समीप स्थित क्षेत्रों में भी जलभराव की समस्या बनी रहती है। कई बार नालों के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी लोगों के घरों और दुकानों तक पहुंच जाता है।

    सामान्य दिनों में ही गलियों में बहता है गंदा पानी

    बाडी माजरा निवासी हरजिंद्र ने बताया कि माडल टाउन और अन्य पाश क्षेत्रों में सफाई कर्मचारी नियमित रूप से काम करते दिखाई देते हैं। लेकिन उनके इलाके में नाले और नालियां लंबे समय से गंदगी से भरी पड़ी हैं। सामान्य दिनों में ही गंदा पानी गलियों में बहता रहता है। ऐसे में बारिश के दौरान हालात और बदतर हो जाते हैं।

    नियमित सफाई की मांगकालोनी निवासी विजय पाल ने कहा कि क्षेत्र की सफाई व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है। ऐसा लगता है कि नालों की सफाई का इंतजार केवल बारिश के समय किया जाता है।

    अधिकांश नाले और नालियां गंदगी से भरे हैं। बारिश होने पर गंदा पानी घरों में घुस जाता है। औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण समस्या और बढ़ जाती है। उन्होंने नगर निगम से नियमित और प्रभावी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

    बाडी माजरा में तालाब ओवरफ्लो होने के कारण दिक्कत आ रही थी। टीम भेज दी गई है। निकासी की समस्या का समाधान हो जाएगा। -महाबीर प्रसाद, कमिश्नर, नगर निगम।