हरियाणा: सीएम विंडो पर शिकायत के डेढ़ साल बाद भी समाधान नहीं,अब PMO का दरवाजा खटखटाएंगे किसान
यमुनानगर के किसान खेतों से बह रहे नाले से फसलों को हो रहे नुकसान से परेशान हैं। सीएम विंडो पर डेढ़ साल से शिकायत का समाधान न होने पर अब वे पीएमओ का दर ...और पढ़ें

सीएम विंडो पर शिकायत के डेढ़ साल बाद भी समाधान नहीं (जागरण फोटो)
HighLights
किसान खेतों से बह रहे नाले से फसलें बर्बाद हो रही हैं
सीएम विंडो पर शिकायत के डेढ़ साल बाद भी समाधान नहीं मिला
समस्या के हल के लिए अब किसान पीएमओ का दरवाजा खटखटाएंगे
जागरण संवाददाता, यमुनानगर। नगर निगम के ममीदी, ईशोपुर सहित अन्य गांवों के रकबे से बह रहे नाले को लेकर अब किसान लामबंद होने लगे हैं।
नाले को एसटीपी में डाइवर्ट करने की मांग को लेकर फरवरी 2025 में सीएम विंडो पर दी गई शिकायत का आज तक समाधान नहीं हो पाया है। व्यवस्था से परेशान किसान चार बार लिखित रिमाइंडर दे चुके हैं और चार बार समाधान शिविर में भी शिकायत दर्ज करा चुके हैं। मौखिक रूप से कितनी बार गुहार लगाई, इसकी गिनती नहीं है।
अब किसानों ने पीएमओ में शिकायत दर्ज कराने का निर्णय लिया है। किसानों का कहना है कि नाले के कारण उनकी फसलें हर साल खराब हो रही हैं। जबकि यह नाला राजस्व रिकार्ड में दर्ज नहीं है। यह किसानों के खेतों से होकर डिच ड्रेन में गिर रहा है।
शिकायतों का लंबा सिलसिला
ममीदी निवासी जय दत्त त्यागी ने बताया कि मौखिक शिकायतों पर कोई कार्रवाई न होने के कारण उन्होंने सबसे पहले पांच फरवरी 2025 को सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने पर तत्कालीन अधिकारियों ने मौके का दौरा किया, लेकिन कार्रवाई केवल निरीक्षण तक ही सीमित रही। इसके बाद 15 मई 2025 को रिमाइंडर भेजा।
सितंबर में उन्हें पत्र मिला, जिसमें 30 अक्टूबर तक समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही। इसके बाद नवंबर में फिर रिमाइंडर दिया। इस दौरान 10 जून तक नाले को डाइवर्ट करने का आश्वासन भी मिला। इतना ही नहीं, किसान चार बार समाधान शिविर में भी शिकायत दे चुके हैं। हर बार यही कहा गया कि जल्द समाधान कर दिया जाएगा।
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हर साल फसलें हो रहीं बर्बाद
किसान अक्षय त्यागी, अनूप कुमार और विजेंद्र ने बताया कि खेतों के बीच से बह रहे नाले के कारण उन्हें हर साल नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस नाले को जोड़िया से एसटीपी की ओर डाइवर्ट किया जा सकता है, क्योंकि जम्मू कॉलोनी में सीवर के पानी के शोधन के लिए एसटीपी लगा हुआ है।
यदि नाले को डाइवर्ट कर दिया जाए तो कई गांवों के किसानों को राहत मिलेगी। इससे फसलें बर्बाद होने से बचेंगी और जमीन भी बंजर नहीं होगी। किसानों का आरोप है कि इस नाले में औद्योगिक इकाइयों का रसायनयुक्त पानी भी छोड़ा जाता है, जिससे जहरीला पानी भूमि में समा रहा है।