हिमाचल सरकार श्री नैना देवी मंदिर के लिए बनाएगी मास्टर प्लान, श्रद्धालुओं को मिलेंगी खास सुविधाएं
हिमाचल सरकार बिलासपुर स्थित श्री नैना देवी जी शक्तिपीठ के लिए मास्टर प्लान तैयार करेगी। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बताया कि छह महीने में आर ...और पढ़ें

बिलासपुर में पहाड़ी पर स्थित श्रीनैना देवी मंदिर। जागरण आर्काइव
HighLights
श्री नैना देवी मंदिर के लिए मास्टर प्लान बनेगा।
छह महीने में आर्किटेक्ट की तैनाती होगी।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित श्री नैना देवी जी शक्तिपीठ में श्रद्धालुओं को अधिकतम सुविधाएं देने और मंदिरों के सुनियोजित विकास के लिए सरकार मास्टर प्लान तैयार करेगी। छह महीनों के भीतर सरकार इस कार्य के लिए आर्किटेक्चर की तैनाती कर देगी। विधायक रणधीर शर्मा के प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रश्नकाल में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान इसमें रखा जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए लिफ्ट की सुविधा मिले इसका प्रविधान भी मास्टर प्लान में किया जाएगा।
श्री नैना देवी व ज्वालाजी के लिए 25 करोड़ का प्रविधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री नैना देवी व ज्वाला जी मंदिर के लिए 25 करोड़ का प्रविधान बजट में किया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल शक्तिपीठों का प्रदेश है। शक्तिपीठों के सौंदर्यीकरण व यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का सरकार विशेष ध्यान रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मंदिर न्यास में स्थानीय विधायक को सदस्य या विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल करने का आश्वासन दिया।
एक ने बनाने की मंजूरी दी, दूसरे ने काम रोकने को कहा : मुकेश
इससे मूल प्रश्न का उत्तर देते हुए उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मंदिर न्यास श्री नैना देवी जी द्वारा वृद्ध एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लिफ्ट स्थापना का कार्य शुरू किया गया था। नया न्यास बना तो उसने इस निर्माण कार्य को रोक लगाने को कहा। सरकार द्वारा करवाए गए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में श्री नैना देवी जी के संपूर्ण परिक्षेत्र को अत्यधिक संवेदनशील एवं खतरनाक क्षेत्र घोषित किया गया है।
विशेषज्ञों ने की निर्माण पर रोक की अनुशंसा
विशेषज्ञों ने भू-स्थिरता के दृष्टिगत इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के भारी निर्माण कार्य अथवा वृहद मशीनरी के उपयोग पर पूर्णत: रोक लगाने की कड़ी अनुशंसा की है। प्रस्तावित स्थल के तंग होने के कारण वहां अत्यधिक भीड़ एकत्र होने की प्रबल संभावना थी, जो सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत जोखिम पूर्ण सिद्ध हो सकता था। न्यास के कहने पर ही काम रोका गया है।
रणधीर शर्मा ने कहा कि उन्होंने यह मामला प्लानिंग की बैठक में भी उठाया था। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि यदि काम रूका है तो उसे दोबारा शुरू करवाया जाएगा। उनके प्रश्न का उत्तर पूरी तरह गुमराह करने वाला है।