Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    हिमाचल के वेल्फेयर ऑफिसर ने परिवार सहित देहदान का संकल्प लिया, रमेश बंसल ने बिलासपुर एम्स में करवाया पंजीकरण

    By Munish Ghariya Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sun, 28 Jun 2026 11:08 AM (IST)

    बिलासपुर के जिला कल्याण अधिकारी रमेश चंद बंसल और उनके परिवार के छह सदस्यों ने एम्स बिलासपुर में देहदान का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि मृत्यु के ब ...और पढ़ें

    रमेश चंद बंसल पूरे परिवार के साथ देहदान के लिए पंजीकण करवाने के बाद बिलासपर एम्स में चिकित्सकों के साथ।

    रमेश चंद बंसल पूरे परिवार के साथ देहदान के लिए पंजीकण करवाने के बाद बिलासपर एम्स में चिकित्सकों के साथ।

    HighLights

    1. रमेश बंसल और परिवार के छह सदस्यों का देहदान संकल्प।

    2. एम्स बिलासपुर में चिकित्सा शिक्षा और शोध हेतु दान।

    3. मानवता की सेवा और अंगदान के प्रति जागरूकता का संदेश।

    शुभम राही, बिलासपुर। समाजसेवा का असली अर्थ केवल जीवन भर दूसरों की मदद करना ही नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी किसी के काम आना है। इसी सोच को साकार करते हुए बिलासपुर के जिला कल्याण अधिकारी रमेश चंद बंसल और उनके परिवार ने ऐसी मिसाल पेश की है, जो दूसरों के लिए भी प्रेरणादायक है। बंसल सहित उनके परिवार के छह सदस्यों ने एम्स बिलासपुर में स्वेच्छा से देहदान का संकल्प लिया है।

    क्या कहना है परिवार का

    देहदान का संकल्प लेने वालों में रमेश चंद बंसल के अलावा उनकी माता चैत्रु देवी बंसल, पत्नी भीमा बंसल, पुत्री अंजलि बंसल, पुत्र आदित्य बंसल और पुत्रवधू अन्नपूर्णा बंसल शामिल हैं। परिवार का कहना है कि मृत्यु के बाद भी उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा, शोध और मानव सेवा के काम आए, इससे बड़ा पुण्य और कोई नहीं हो सकता। 

    ऐसे मरीज देखे जिन्हें हमारे अंगों की जरूरत

    रमेश चंद बंसल ने बताया कि वह वर्ष 1998 से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में सेवाएं दे रहे हैं। करीब 27 वर्ष के कार्यकाल में उन्हें दिव्यांगजन, वृद्धाश्रमों और जरूरतमंद लोगों के बीच काम करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने ऐसे अनेक मरीजों को देखा, जो आंख, किडनी, लीवर, हृदय और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करते हुए जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। इन अनुभवों ने उन्हें अंगदान और देहदान जैसे महादान के महत्व का एहसास कराया। 

    बचाई जा सकती हैं कई जानें

    उनका कहना है कि यदि समय पर अंग उपलब्ध हो जाएं तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। वहीं, मृत्यु के बाद देहदान से मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और चिकित्सा अनुसंधान को भी नई दिशा मिलती है।

    खबरें और भी

    इससे भी मिली प्रेरणा

    रमेश चंद बंसल ने बताया कि वर्ष 2014 में राधा स्वामी सत्संग ब्यास से जुड़ने के बाद सेवा, परोपकार और मानवता के मूल्यों से उन्हें विशेष प्रेरणा मिली। उन्होंने लोगों से अंगदान व देहदान के प्रति जागरूक होने तथा मानवता की सेवा के इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।

    यह भी पढ़ें: हिमाचल बिजली बोर्ड के अनुबंध कर्मचारियों को बड़ी राहत, वेतन में 14 से 15 हजार रुपये तक की वृद्धि होगी