खड़े पहाड़, तीखी ढलान... 2 दिन पैदल चलकर बड़ा भंगाल से बीमार व्यक्ति रेस्क्यू, देवदूत बनकर मौत के मुंह से बचा लाई टीम
कांगड़ा के दुर्गम बड़ा भंगाल से एक गंभीर बीमार व्यक्ति को खराब मौसम के बावजूद दो दिन के पैदल अभियान के बाद सुरक्षित चंबा अस्पताल पहुंचाया गया। ...और पढ़ें
HighLights
दुर्गम बड़ा भंगाल से बीमार व्यक्ति का सफल रेस्क्यू।
खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर सेवा अनुपलब्ध रही।
13 सदस्यीय पर्वतारोहण दल ने दो दिन में जान बचाई।
जागरण टीम, भरमौर/चंबा। जिला कांगड़ा के दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल से गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति का सफल रेस्क्यू कर उसे उपचार के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, चंबा पहुंचाया गया। विषम मौसम के कारण हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध न होने पर प्रशासन ने विशेष पर्वतारोहण (रेस्क्यू) दल के माध्यम से अभियान चलाया, जो करीब दो दिन तक चला।
डीसी कांगड़ा ने भरमौर प्रशासन से किया संपर्क
जानकारी के अनुसार बड़ा भंगाल में एक व्यक्ति के गंभीर रूप से बीमार होने की सूचना जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) कांगड़ा और उपायुक्त कांगड़ा के माध्यम से अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी भरमौर विकास शर्मा को मिली।
हेलीकॉप्टर नहीं उड़ सका तो 13 देवदूत आए सामने
मरीज की नाजुक हालत और खराब मौसम के चलते हेलीकॉप्टर नहीं उड़ सका। इसके बाद एडीएम के निर्देश पर पर्वतारोहण अनुदेशक पंकज महंत के नेतृत्व में 13 सदस्यीय विशेष रेस्क्यू टीम का गठन किया गया। ये 13 देवदूत व्यक्ति को मौत के मुंह से बचाकर ले आए।
कठिन चढ़ाई और खराब मौसम में किया रेस्क्यू
रेस्क्यू दल 18 जुलाई को भरमौर से बड़ा भंगाल के लिए रवाना हुआ और दुर्गम पर्वतीय मार्गों को पार करते हुए उसी रात मरीज तक पहुंच गया। 19 जुलाई की सुबह मरीज को स्ट्रेचर पर सुरक्षित निकालकर पैदल रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। कई घंटे तक कठिन चढ़ाई, खराब मौसम और चुनौतीपूर्ण रास्तों से गुजरने के बाद टीम रात करीब 11 बजे मरीज को सुरक्षित धराड़ी पहुंचाने में सफल रही।
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पहले से तैनात एंबुलेंस में भेजा चंबा
धराड़ी में पहले से तैनात एंबुलेंस के माध्यम से मरीज को तुरंत पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, चंबा भेजा गया, जहां उसका उपचार जारी है।
प्रशासन ने बताया कि यह अभियान भरमौर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला चंबा के प्रभावी समन्वय और त्वरित निर्णय का परिणाम रहा। पर्वतारोहण अनुदेशक पंकज महंत और उनकी 13 सदस्यीय टीम ने विषम परिस्थितियों में साहस, धैर्य से संभव हो पाया।