चंबा हादसा: सिसकियों से गूंजा रावी का तट, परिवार के 4 सदस्यों की एक साथ जली चिताए; 3 महीने का मासूम किया दफन
चंबा में एक दर्दनाक सड़क हादसे में चंडीगढ़ से लौट रहे एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई, जिनकी चिताएं रावी तट पर एक साथ जलीं। तीन माह के मासूम ...और पढ़ें

चंबा हादसे में एक ही परिवार के 5 सदस्यों की मौत के बाद बुधवार को अंतिम संस्कार किया गया।
HighLights
चंडीगढ़ से लौटते समय चंबा में परिवार का दर्दनाक हादसा।
रावी तट पर एक साथ जलीं चार परिवारजनों की चिताएं।
तीन माह के मासूम बच्चे को दी गई भू-समाधि।
संवाद सहयोगी, मैहला (चंबा)। जिंदगी का नया उजाला पाने की उम्मीद में चंडीगढ़ पीजीआई से लौटा एक हंसता-खेलता परिवार जब लाशों में तब्दील होकर घर पहुंचा, तो चट्टानों का सीना भी फटने लगा। बुधवार की सुबह जब रावी नदी किनारे गैहरा में चार चिताओं को एक साथ मुखाग्नि दी गई, तो कुदरत का कलेजा भी कांप उठा। वहीं, तीन माह के जिस मासूम बच्चे की किलकारियों को सुनने के लिए पूरा परिवार मन्नतें मांग रहा था, उसे हिंदू रीति-रिवाज से (दफनाया) भू-समाधि दी गई।
पुलिस जवान रिपन को दी सलामी
बुधवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे गैहरा में रावी नदी किनारे का माहौल शब्दों से परे था। हिमाचल प्रदेश पुलिस की सेकेंड आईआरबीएन (सकोह) में तैनात मृतक जवान रिपन कुमार को जब पुलिस के जवानों ने अंतिम सलामी दी, तो वहां मौजूद हर शख्स का कलेजा मुंह को आ गया।
नोएडा से घर पहुंचे विपन ने दी भाई-भाभी व पिता समेत 4 सदस्यों को मुखाग्नि
नोएडा की एक निजी कंपनी से बेसुध हालत में गांव पहुंचे विपन कुमार (मृतक रिपन के सगे भाई व बचन सिंह के बड़े बेटे) ने अपने पिता बचन सिंह, भाई रिपन, भाभी रिम्पी और कीर्ति की चिताओं को एक-एक कर मुखाग्नि दी। अपने ही कांपते हाथों से पूरे परिवार को राख में तब्दील होते देखना... यह दृश्य इतना मार्मिक था कि वहां मौजूद हर शख्स फफक-फफक कर रो पड़ा।
गैहरा में छाया मातम चीखों में बदला
गैहरा गांव में मंगलवार से छाए मातम ने बुधवार को चीखों का रूप ले लिया। गांव में लगातार दूसरे दिन की सुबह किसी घर का चूल्हा नहीं जला। जिस मासूम के स्वस्थ होकर लौटने की खुशी में गांव मिठाइयां बांटने का इंतजार कर रहा था, उसकी छोटी सी देह को मिट्टी के सुपुर्द करते देख हर बुजुर्ग और मां की आंखें छलक पड़ीं। इलाज जिंदगी देता है, लेकिन इस परिवार के लिए अस्पताल से घर तक का यह सफर जिंदगी का आखिरी सफर बन गया।
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नियति की इस क्रूरता ने बचन सिंह की पत्नी तृप्ता देवी और बेटे विपन के सिर से पूरे परिवार का साया छीन लिया। एक हंसता-खेलता परिवार अब केवल यादों और रावी के किनारे उठी राख में सिमट कर रह गया है।
चंडीगढ़ में बच्चे की होंठ की सर्जरी करवाने गया था परिवार
मासूम के जन्मजात कटे होंठ की पहली सर्जरी सफल रही थी। दूसरी सर्जरी के लिए परिवार फिर चंडीगढ़ पहुंचा था। डाक्टरों ने सफल इलाज के बाद उम्मीदें दीं और स्वजन राहत की सांस लेते हुए खुशियों के साथ घर के लिए रवाना हुए थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। सोमवार देर रात पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाहड़ के पास तेज बारिश के बीच अनियंत्रित होकर आल्टो कार करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरी।