हिमाचल में बर्फीले तूफान में खो गई बचा लो की पुकार, ...विकसित की आखिरी कॉल; ठंड में सुन्न उंगलियां नहीं भेज पाई लोकेशन
Himachal Pradesh Snowstorm, हिमाचल प्रदेश के भरमौर में बर्फीले तूफान में फंसे विकसित राणा और पीयूष की दुखद मौत हो गई। विकसित ने अपनी अंतिम कॉल में मदद ...और पढ़ें

विकसित राणा का फाइल फोटो और पीयूष के शव के पास खड़ा पिटबुल डॉगी।
HighLights
विकसित राणा ने बर्फीले तूफान में मदद के लिए अंतिम कॉल की।
ठंड से सुन्न उंगलियों के कारण लोकेशन नहीं भेज पाए।
चार दिन बाद दोनों युवकों के शव बरामद हुए।
मनोज ठाकुर, भरमौर (चंबा)। हिमाचल प्रदेश के भरमौर में मां भरमाणी माता मंदिर के बर्फ़ीले जोत का वो पल लोगों की रूह कंपा रहा है, जब विकसित मोबाइल पर बार-बार कह रहा था भाई, हमें बचा लो… हम फंस गए हैं। भरमौर क्षेत्र से लापता हुए विकसित राणा की यह आख़िरी गुहार गांव के ही युवक अक्षय तक पहुंची, लेकिन कुदरत की बेरहमी ने समय को उनसे पहले पकड़ लिया।
विकसित ने पहली कॉल में बताया, मैं अभी डफ्फर का गोठ पहुंचने की कोशिश कर रहा हूं। पीयूष की हालत बहुत खराब हो गई है, मैं उसे लेकर नीचे आ रहा हूं। बात अधूरी रह गई और कॉल कट गई। कुछ देर बाद फोन फिर बजा। इस बार आवाज़ में घबराहट, थकान और डर साफ़ था। विकसित ने कहा, भाई, हम बहुत बुरी तरह फंस गए हैं। पीयूष की हालत और बिगड़ गई है। मैंने उसे पीठ पर उठाया हुआ है। प्लीज़… हमें बचा लो।
नहीं भेज पाया लोकेशन
अक्षय ने तुरंत अपनी लोकेशन विकसित को भेज दी, लेकिन भीषण ठंड यहां सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी थी। विकसित का आईफोन अत्यधिक ठंड व खराब मौसम के कारण ठीक से काम नहीं कर रहा था। उसने जवाब दिया, भाई मेरी उंगलियां काम नहीं कर रहीं, मैं लोकेशन कैसे भेजूं? ठंड से सुन्न होती उंगलियां और गिरता तापमान हर मिनट हालात को और खतरनाक बना रहे थे। कुछ ही पलों बाद फोन फिर कट गया और उसके बाद संपर्क कभी नहीं हो सका।
चार दिन की कड़ी चुनौती के बाद मृत मिले दोनों
इसके बाद गांव में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग, प्रशासन और राहत दल हरकत में आए। चार दिन तक ड्रोन, एनडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग, स्थानीय लोग और सेना के हेलीकॉप्टर की मदद से भरमाणी माता मंदिर की दुर्गम पहाड़ियों में व्यापक सर्च अभियान चला। भारी बर्फबारी, तेज़ ठंड और फिसलन भरे रास्ते अभियान के सामने बड़ी चुनौती बने रहे।
चार दिन बाद विकसित राणा और पीयूष का शव बरामद हुआ। उस खबर के साथ ही गांव की उम्मीद टूट गई और मातम पसर गया।
विकसित ही था मां का सहारा
विकसित ने जमा दो के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। उसे वीडियो बनाने और ब्लॉगिंग का गहरा शौक था कुछ अलग करने की चाह उसे जोखिम भरी राहों तक ले गई। परिवार पहले से ही संघर्ष में था। पिता का पिछले वर्ष निधन हो चुका था। मां अनिता कुमारी दूध बेचकर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। एक बहन है, जिसकी शादी हो चुकी है। विकसित ही घर की सबसे बड़ी उम्मीद था।
खबरें और भी
पीयूष के परिवार की स्थिति नहीं ठीक
भरमौर के घरेड़ गांव के रहने वाले 13 वर्षीय पीयूष के पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। हादसे के दिन भी उसके मां व पिता नूरपुर में अस्पताल गए हुए थे। पीयूष के दो भाई व तीन बहनें हैं। बड़ा भाई गणेश ही परिवार का सहारा है, जो बारहवीं के बाद दिहाड़ी मजदूरी कर रहा है।
बर्फ में खो गई बचा लो की पुकार
यह हादसा केवल दो लड़कों की मौत की कहानी नहीं, बल्कि उन आख़िरी मिनटों की त्रासदी है, जब मदद बस कुछ दूर थी और भाई हमें बचा लो, की पुकार बर्फ़ में कहीं खो गई।
भरमौर में बर्फ़ीले तूफान का शिकार विकसित राणा का आखिरी वीडियो pic.twitter.com/eYEyYAb8Fm
— Rajesh Sharma (@sharmanews778) January 27, 2026