हिमाचल में 55 लाख रुपये का मनरेगा घोटाला, 22 अधिकारी जांच के दायरे में; कई कार्यों में नहीं लगाया मटेरियल
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में मनरेगा के तहत 55 लाख रुपये के कथित गबन की विजिलेंस जांच तेज हो गई है। इस मामले में 22 अधिकारी जांच के दायरे में हैं। ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में 55 लाख रुपये का मनरेगा घोटाला हुआ है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
चंबा में मनरेगा के 55 लाख रुपये के गबन की जांच शुरू।
विजिलेंस ने 22 अधिकारियों को जांच के दायरे में लिया।
41 में से 32 कार्यों में अनियमितताएं पाई गईं।
जागरण संवाददाता, चंबा। हिमाचल प्रदेश में जिला चंबा के वनमंडल चंबा और चुराह की तीन वन रेंजों में मनरेगा के तहत सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच शुरू हो गई है। लगभग 55 लाख रुपये के कथित गबन के मामले में विजिलेंस ने 29 जुलाई को एफआइआर दर्ज करने के बाद कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसी अब संबंधित रेंजों का सरकारी रिकार्ड कब्जे में लेने जा रही है। इसमें भुगतान प्रक्रिया, तकनीकी स्वीकृतियां, सामग्री खरीद, मस्टररोल और अन्य अभिलेखों की जांच की जाएगी। घोटाले की शिकायत 2022 में उपायुक्त को दी गई थी।
ये जांच के दायरे में
इस मामले में छह तत्कालीन वनखंड अधिकारी और 16 वनरक्षक जांच के घेरे में हैं। जिन अधिकारियों के कार्यकाल में मनरेगा कार्य हुए, वे अब वन परिक्षेत्र अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। जांच में शामिल 16 वनरक्षकों में से चार पदोन्नति पाकर वन खंड अधिकारी बन चुके हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए सेवानिवृत्त अधिकारियों के कार्यकाल से जुड़े रिकार्ड की भी जांच की जाएगी।
विजिलेंस करेगी मूल्यांकन, 32 कार्यों में अनियमितताएं
जांच का अगला चरण रिकॉर्ड कब्जे में लेकर साक्ष्यों को जोड़ने का होगा। विजिलेंस तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से प्रत्येक निर्माण कार्य का मूल्यांकन करेगी। शिकायतों के आधार पर डीआरडीए ने 41 विकास कार्यों की जांच की, जिसमें 32 कार्यों में अनियमितताएं पाई गईं। कई कार्यों में सामग्री का उपयोग नहीं पाया गया या रिकार्ड में दर्शाई गई मात्रा से कम मिला।
प्रशासनिक प्रक्रिया की भी पड़ताल
विजिलेंस केवल वित्तीय अनियमितताओं की जांच नहीं कर रही, बल्कि पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की भी पड़ताल करेगी। यदि अन्य अधिकारियों या बाहरी व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है, तो उन्हें भी जांच में शामिल किया जाएगा। विजिलेंस का ध्यान दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच पर केंद्रित है।
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