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    हिमाचल में आउटसोर्सिंग सेवाओं के मामलों में सरकार के ढीले रवैये पर हाई कोर्ट सख्त, शपथपत्र न देने पर फटकार लगाई

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Wed, 05 Aug 2026 12:24 PM (IST)

    हिमाचल हाई कोर्ट ने सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग सेवाओं पर सरकार के ढीले रवैये पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने शपथपत्र दाखिल न करने पर ₹50,000 का जुर्म ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने आउटसोर्सिंग पर सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई।

    2. शपथपत्र न देने पर ₹50,000 जुर्माने की चेतावनी दी।

    3. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार विफल रही।

    विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग सेवाओं के मामलों पर सरकार के ढीले रवैये पर नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने कहा कि सरकार इस मामले में निजी वादी की तरह व्यवहार कर केवल समय टालने का प्रयास कर रही है। अदालत ने सरकार को आगामी सुनवाई तक पूरी जानकारी के साथ शपथपत्र दाखिल करने का अंतिम मौका दिया है। ऐसा न करने पर सरकार पर ₹50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जिसे आइजीएमसी शिमला के पुअर पेशेंट्स फंड में जमा करना होगा।

    6 याचिकाओं से संबंधित है मामला

    यह मामला आउटसोर्स से जुड़ी लगभग छह याचिकाओं से संबंधित है, जिसमें तीन वर्ष के दौरान विभागों में की आउटसोर्सिंग का ब्योरा मांगा था। सुनवाई के दौरान जब सरकार ने डाटा सूची पेश की तो कोर्ट ने उसमें गंभीर विसंगतियां और विरोधाभास पाए। कई महत्त्वपूर्ण स्थानों पर स्वीकृत और खाली पदों की संख्या को केवल शून्य दर्शाया था। 

    स्वीकृत पदों में अंतर

    याचिकाकर्ताओं ने बताया कि अकेले स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में स्वीकृत पदों की संख्या 24,188 है। इसके विपरीत सरकार ने जो नई सूची पेश की है, उसमें राज्य के सभी 46 विभागों को मिलाकर कुल स्वीकृत पदों की संख्या 30,805 दिखाई है, जोकि व्यावहारिक रूप से गलत प्रतीत होती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने दिया था शपथपत्र दाखिल करने का आदेश

    हाई कोर्ट द्वारा पूर्व में 18 मई और 16 जून 2026 को दिए गए अंतरिम आदेशों के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं दायर की थीं। सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को निर्देश दिया था कि राज्य सरकार अगले पांच कार्य दिवसों के भीतर हाई कोर्ट के समक्ष अपना पूर्ण शपथपत्र दाखिल करे। सरकार को स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना (06.11.2025) के तहत चयन और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की छूट होगी, लेकिन ये नियुक्तियां हाई कोर्ट में लंबित इस रिट याचिका के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।

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    सरकार विवरण प्रस्तुत करने में विफल

    हाई कोर्ट की खंडपीठ ने नोट किया कि सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट समयसीमा मिलने के बावजूद हिमाचल सरकार निर्धारित पांच दिन के भीतर पूरा विवरण प्रस्तुत करने में विफल रही है। हाई कोर्ट ने इसे 13 अगस्त को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए हैं।

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