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मणिमहेश यात्रा: जन्माष्टमी पर डल झील में डुबकी लगाना क्यों है खास, कब से कब तक रहेगा शुभ मुहूर्त?

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 03 Sep 2026 12:43 PM (IST)Updated: Thu, 03 Sep 2026 01:52 PM (IST)

श्री मणिमहेश यात्रा में जन्माष्टमी का पावन स्नान 4 सितंबर की रात से 5 सितंबर दोपहर तक होगा, जिसमें डल झील में डुबकी लगाना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

मणिमहेश झील में जन्माष्टमी पर पवित्र स्नान होगा। जागरण आर्काइव

मणिमहेश झील में जन्माष्टमी पर पवित्र स्नान होगा। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. जन्माष्टमी स्नान 4 सितंबर रात से 5 सितंबर दोपहर तक चलेगा।

  2. डल झील में डुबकी लगाना अत्यंत फलदायी और मनोकामना पूर्ण करता है।

  3. यात्रा ट्रैक पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम, रात में चलने पर पाबंदी।

जागरण टीम, चंबा। श्री मणिमहेश यात्रा में आस्था का पहला मुख्य महापर्व जन्माष्टमी स्नान चार सितंबर को होगा। चौरासी मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित छज्जू राम शर्मा के अनुसार कृष्ण पक्ष में रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ धार्मिक संयोग के बीच जन्माष्टमी का पावन स्नान चार सितंबर को रात 2:26 बजे से आरंभ होगा, जो पांच सितंबर दोपहर 12.14 बजे तक चलेगा। 

डुबकी लगाना बेहद फलदायी

इस अत्यंत शुभकाल में पवित्र डल झील यानी शिव कुंड में डुबकी लगाना अमोघ फलदायी माना जाता है। माना जाता है इस अवधि में मणिमहेश झील में स्नान से कष्टों से मुक्ति मिलती है व मनोकामना पूर्ण होती है। 

राधाष्टमी को होगा बड़ा न्हौण

इसके बाद यात्रा का सबसे बड़ा राधाष्टमी न्हौण 18 सितंबर दोपहर एक बजे से 19 सितंबर शाम 3.28 बजे तक चलेगा। 

जोखिम भरे ट्रैक पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

प्रशासन ने समूचे यात्रा ट्रैक को 13 सेक्टरों में बांटा है। 1,000 से अधिक पुलिस और होमगार्ड जवान व्यवस्था का संभाल रहे हैं। हड़सर से डल झील तक 13 किलोमीटर से ज्यादा का पैदल मार्ग संकरा और खड़ी चढ़ाई वाला है।

बरतें ये सावधानियां 

खतरनाक स्थलों पर रात में चलने पर पाबंदी रहेगी। यात्री मजबूत ग्रिप वाले जूते, गर्म कपड़े, रेनकोट, टार्च व जरूरी दवाएं साथ रखें तथा संकरे रास्तों पर घोड़े-खच्चरों से सुरक्षित दूरी बनाकर चलें। 

ये जोखिम भरे प्वाइंट्स

धनछो के आसपास, बंदर घाटी, भैरव घाटी तथा सुंदरासी के दुर्गम मोड़ फिसलन भरे और भूस्खलन के प्रति संवेदनशील हैं। तोष का गोठ व दोनाली में पत्थर गिरने के साथ साथ ही भूस्खलन भी होता है।

पैदल ट्रैक व हाईवे पर भी रात को पाबंदी

श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए हड़सर से डल झील तक शाम सात से सुबह चार बजे तक पैदल चलने पर पूर्ण पाबंदी है, जबकि मैहला से आगे रात 11 बजे से सुबह चार बजे तक वाहनों की आवाजाही बंद रखी गई है।

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