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    धर्मशाला नगर निगम के तीन BJP पार्षदों की सदस्यता खतरे में, अवैध कब्जे पर DC ने कार्रवाई के लिए भेजा पत्र

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Tue, 30 Jun 2026 03:28 PM (GMT+05:30)

    धर्मशाला नगर निगम के तीन नवनिर्वाचित भाजपा पार्षदों पर सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगा है। शिकायत के बाद जांच में अतिक्रमण पाए जाने पर उपायुक्त ...और पढ़ें

    उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा धर्मशाला में मीडिया से बात करते हुए। जागरण

    उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा धर्मशाला में मीडिया से बात करते हुए। जागरण

    HighLights

    1. तीन नवनिर्वाचित भाजपा पार्षदों पर अवैध कब्जे का आरोप।

    2. उपायुक्त कांगड़ा ने जांच के बाद कार्रवाई की सिफारिश की।

    3. हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम के तहत अयोग्य घोषित हो सकते हैं।

    जागरण संवाददाता, धर्मशाला। नगर निगम धर्मशाला के तीन नवनिर्वाचित पार्षदों पर भूमि पर अवैध कब्जा करने के आरोप लगे हैं। शिकायत के आधार पर प्रशासन ने जांच की और अब ऐसे में संबंधित तीन पार्षदों पर अयोग्य घोषित होने की तलवार लटक गई है। नगर निगम धर्मशाला में पार्षदों की शपथ बीते रोज हुई है और कोरम पूरा न होने के कारण महापौर व 
    उपमहापौर का चुनाव नहीं हो सका था। महापौर व उपमहापौर का चुनाव एक जुलाई को होना प्रस्तावित है। 

    धर्मशाला के 17 वार्डों में से भाजपा के पास 11 व कांग्रेस के पास 5 पार्षद हैं, जबकि एक पार्षद निर्दलीय है। ऐसे में भाजपा बहुमत में है। लेकिन तीन पार्षदों पर गाज गिरती है तो भाजपा का आंकड़ा आठ रह जाएगा। धर्मशाला नगर निगम चुनाव 2026 के संपन्न होने के बाद नवनिर्वाचित पार्षदों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    उपायुक्त ने कार्रवाई की सिफारिश करते हुए भेजा पत्र

    उपायुक्त कांगड़ा ने 24 जून को शहरी विकास विभाग को आवश्यक कानूनी कार्रवाई की सिफारिश करते हुए पत्र भेजा है। नवनिर्वाचित तीन पार्षदों पर अतिक्रमण से जुड़ी शिकायत पर उपमंडलादिकारी धर्मशाला ने तहसीलदार, कानूनगो व फील्ड कानूनगो व पटवारी से मामले की जांच करवाई है। इसकी जांच रिपोर्ट उपायुक्त को दी गई और उपायुक्त ने इस मामले को अब कार्रवाई के लिए शहरी विकास विभाग व सरकार को भेजा है।

    पार्षदों पर ये हैं आरोप

    बताया जा रहा है कि वार्ड नंबर दो भागसूनाग के पार्षद शमशेर सिंह नेहरिया पर होटल के पास वन विभाग की सरकारी भूमि (गैर मुमकिन नाला) पर कंक्रीट का स्लैब डालकर पार्किंग स्पेस बनाने का आरोप है। वार्ड नंबर 15 के पार्षद प्रवीण कमार का सरकारी भूमि पर अवैध मकान होने का आरोप है। इसके अलावा वार्ड नंबर 17 सिद्धपुर के पार्षद विशाल जम्वाल के नाम पर साल 2003 से अवैध दुकान में बिजली का मीटर चल रहा था। चुनाव के बीच 16 अप्रैल 2026 को इस मीटर को ट्रांसफर किया गया।

    कानून के तहत क्या है व्यवस्था

    हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 8(एल) के तहत यदि कोई जनप्रतिनिधि या उसका कानूनी वारिस (पत्नी, बच्चे या पोते) सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का दोषी या उसका 'लाभार्थी' पाया जाता है, तो उसे अयोग्य घोषित करने का कड़ा प्रविधान है। बेदखली के 6 साल बीतने तक वह चुनाव भी नहीं लड़ सकता।

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    यह हो सकता है

    उपायुक्त कांगड़ा ने रिपोर्ट आगामी कार्रवाई के लिए प्रधान सचिव (शहरी विकास) शिमला को भेज दी है। अब मामले में सरकार को फैसला लेना है। कार्रवाई के तौर पर नोटिस जारी होता है या नहीं।

    चुनाव प्रक्रिया पूरी हो गई तो हमें शिकायत मिली कि हमारे चुने हुए पार्षदों व उनके स्वजन की सरकारी जमीन पर कब्जे हैं। एसडीएम के माध्यम से जांच करवाई। इसमें तथ्य आए कि उसमें अतिक्रमण है। जांच शुरू कर दी है और नगर निगम अधिनियम के तहत रिपोर्ट सरकार को भेजी है। सरकार ऐसे मामलों को तय करने के लिए एक अधिकारी को नियुक्त करती है। सरकार किसी अधिकारी को प्राधिकृत करके इस पर नियम के तहत कार्रवाई करेगी। चुनाव लड़ने से पहले एफिडेविड दिया जाता है उस वक्त ही यह चीजें सामने आ जानी चाहिए थी, लेकिन बाद में शिकायत आई तो उस पर पड़ताल की गई।
    -हेमराज बेरवा, उपायुक्त, कांगड़ा।

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