हरीश राणा का हिमाचली कनेक्शन, परिवार ने 37 साल पहले छोड़ा था पैतृक गांव; 2013 में रक्षा बंधन वाले दिन हुआ था हादसा
हरीश राणा की असाध्य पीड़ा से हिमाचल का पलेटा गांव दुखी है। 2013 में दुर्घटना के बाद से बिस्तर पर ...और पढ़ें
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कैप्शन: हिमाचल के पलेटा गांव से संबंध रखता है हरीश (जागरण फोटो)

समय कम है?
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जागरण टीम, धर्मशाला। कांगड़ा जिले के जयसिंहपुर में सरी पंचायत का छोटा सा गांव है प्लेटा, जहां सन्नाटा पसरा हुआ है। इसी गांव का बेटा हरीश राणा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एम्स में असाध्य पीड़ा से मुक्ति पा रहा है।
हरीश अपने तीन भाई बहनों में सबसे बड़ा है, उसकी छोटी बहन की शादी हो चुकी है जबकि छोटा भाई अविवाहित है। हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने 1989 में दिल्ली का रुख इसलिए किया था कि बच्चों की अच्छी परवरिश हो सके...उनका जीवन बेहतर हो सके। सब कुछ अच्छा चल रहा था। पत्नी व तीन बच्चों के साथ परिवार हंसी-खुशी जी रहा था, लेकिन एक अनहोनी ने परिवार को ऐसा सदमा दिया कि परिवार टूट गया।
फोटो: हरीश फाइल फोटो
एक जवान बच्चे का 13 साल तक बिस्तर पर लालन-पालन करना किसी के लिए भी असंभव सा लगता है। अशोक राणा और उनकी पत्नी निर्मला देवी ने आह तो भरी लेकिन उफ्फ नहीं की। लेकिन अब बुढ़ापे की दहलीज पर खड़े इस दंपती ने बेटे के लिए देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत 11 मार्च को माता-पिता की पीड़ा समझते हुए हरीश को इच्छा मृत्यु की अनुमति दी।
क्या बोले पलेटा निवासी?
पलेटा निवासी व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सदस्य खुशी राम भूरिया कहते हैं कि कोरोना काल में भी यह परिवार हरीश को लेकर अपने पैतृक गांव आया था, लेकिन यह बच्चा बिस्तर पर ही पड़ा रहता था। परिवार इसकी परवरिश एक नवजात की तरह ही करता रहता था, लेकिन अब इस बात से उनका मन भी व्यथित है कि बच्चे को बचाया नहीं जा सकता है।
कैप्शन: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के जयसिंहपुर के प्लेटा गांव का साइन बोर्ड। जागरण
तीन भाइयों में अशोक दूसरे नंबर पर हैं। बड़े भाई प्रीतम व छोटे भाई बलदेव हैं। प्रीतम लुधियाना में रहते हैं जबकि बलदेव भी दिल्ली में रहते हैं। इस बच्चे के लिए माता-पिता ने जो तप किया वह कोई नहीं कर सकता है। यहां पर तीनों भाइयों के अपने घर हैं। अशोक राणा रिश्तेदारों के विवाह समारोह में आते भी रहते हैं, जबकि माता निर्मला बच्चे के साथ ही वहीं रहती थीं।
अशोक परिवार के साथ गाजियाबाद में रहते हैं
अशोक राणा के परिवार में पत्नी निर्मला देवी, बेटा हरीश राणा व आशीष राणा और एक बेटी है। अभी अशोक परिवार के साथ गाजियाबाद में रहते हैं। बेटा हरीश 2013 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक अंतिम वर्ष का छात्र था। 20 अगस्त 2013 को रक्षाबंधन पर हरीश ने शाम 6:30 बजे अपनी बहन से बात की थी।
कैप्शन: बेटे हरीश राणा से कुछ कहने का प्रयास करती माता निर्मला। सौ. इंटरनेट मीडिया
उस समय हरीश की उम्र करीब 22 वर्ष थी। एक घंटे बाद उन्हें खबर मिली कि उनका बेटा उनके पेइंग गेस्ट भवन की चौथी मंजिल से गिर गया।
बेटे के इलाज के लिए बेच दिया मकान
बेटे के इलाज के लिए उन्होंने अपना दिल्ली का मकान सितंबर 2021 में बेच दिया और गाजियाबाद चले गए थे। सभी अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए। बेटे के लिए अशोक राणा ने हर कुछ किया। दिल्ली का तीन मंजिला घर बेचा, सड़कों पर सैंडविच बेचे, हर महीने 70 हजार का इंतजाम किया। बस एक आस थी कि शायद एक दिन बेटा आंख खोले।
पलेटा में बना अशोक राणा का घर हरीश और उनके परिवार के लिए भविष्य की नई उम्मीदों का केंद्र था। आज उसी घर के आंगन में सन्नाटा है और गांववासी गमगीन हैं।
गांव में होने वाली चर्चाओं में केवल हरीश व उनके परिवार के धैर्य की बातें हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हरीश के स्वजनों ने उन्हें इस स्थिति से निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
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