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    हिमाचल की पंचायतों में प्रशासकों की तैनाती के बाद खड़ी हुई बड़ी समस्या, सत्यापन रिपोर्ट और अंतिम हस्ताक्षर कौन करेगा?

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sat, 07 Feb 2026 02:01 PM (IST)

    हिमाचल प्रदेश में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नियुक्त प्रशासकों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों की कमी से समस्याएँ खड़ी हो गई हैं। ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में प्रशासक की नियुक्ति के बाद भी समस्या खड़ी हो गई है। प्रतीकात्म्क फोटो

    हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में प्रशासक की नियुक्ति के बाद भी समस्या खड़ी हो गई है। प्रतीकात्म्क फोटो

    HighLights

    1. प्रशासकों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देशों का अभाव बड़ी समस्या।

    2. प्रमाणपत्रों के सत्यापन और अंतिम हस्ताक्षर पर गतिरोध।

    3. पंचायतों की न्यायिक शक्तियों का शून्य, विवाद निपटान बाधित।

    साहिल ठाकुर, जसवां परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में पंचायत जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद सरकार ने प्रशासकों की नियुक्ति तो कर दी है, लेकिन कार्यप्रणाली को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देशों के अभाव में जमीन स्तर पर गतिरोध पैदा हो गया है। वर्तमान व्यवस्था के तहत खंड विकास अधिकारियों को पंचायतों का अध्यक्ष नियुक्त किया है और पंचायत सचिव सदस्य के रूप में कार्य कर रहे हैं, लेकिन शक्तियों के विभाजन और प्रमाणपत्रों को जारी करने की प्रक्रिया पर स्थिति अब भी धुंधली है।

    यह समस्या आ रही

    सबसे बड़ी समस्या चरित्र, बोनाफाइड, कानूनी वारिस और बेरोजगारी प्रमाणपत्रों को लेकर आ रही है। इनके लिए पहले पंचायत प्रधान की रिपोर्ट अनिवार्य होती थी। प्रधान स्थानीय स्तर पर नागरिकों के चरित्र और पृष्ठभूमि से परिचित होते थे और इसके आधार पर वे संस्तुति देते थे। अब जबकि प्रधान का पद रिक्त है और शक्तियां खंड विकास अधिकारी के पास हैं, पंचायत सचिव इस दुविधा में हैं कि इन दस्तावेजों पर सत्यापन की रिपोर्ट कौन करेगा और अंतिम हस्ताक्षर किसके होंगे।

    स्पष्ट सर्कुलर न होने से जनता परेशान

    सरकार की ओर से इस विषय पर स्पष्ट सर्कुलर जारी न होने से आम जनता को इन जरूरी कागजातों के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। प्रमाणपत्रों के अलावा पंचायतों की न्यायिक शक्तियों को लेकर भी बड़ा शून्य पैदा हो गया है। 

    पंचायत को रहता है सुनवाई का अधिकार

    चुनी हुई पंचायतों के पास फौजदारी, दीवानी और राजस्व से जुड़े छोटे मामलों की सुनवाई का अधिकार था, जिससे ग्रामीण स्तर पर ही विवादों का निपटारा हो जाता था। कार्यकाल पूरा होने के बाद ये शक्तियां अब किसके पास हैं, इस पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। 

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    झगड़ों के मामले किसके पास भेजें

    मारपीट या आपसी झगड़ों के मामलों में पंचायत सचिवों को यह समझ नहीं आ रहा कि वे फरियादियों को किसके पास भेजें। पंचायत स्तर के कर्मचारी इस बात से चिंतित हैं कि बिना किसी लिखित आदेश के यदि वे किसी मामले में कार्रवाई करते हैं या रिपोर्ट देते हैं तो भविष्य में उन पर कानूनी सवाल खड़े हो सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की मांग है कि सरकार जल्द विस्तृत गाइडलाइंस जारी करे। 

    पंचायत सचिव संघ ने किया संवाद

    हिमाचल प्रदेश पंचायत सचिव संघ के मुख्य संरक्षक अमित जसरोटिया ने बताया कि इन सारे विषयों को लेकर डायरेक्टर पंचायती राज को पत्र लिखा है तथा उम्मीद है कि शीघ्र निदेशालय की ओर से दिशानिर्देश जारी कर दिए जाएंगे।

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    क्या कहते हैं अधिकारी

    कांगड़ा जिला के पंचायत अधिकारी सचिन ठाकुर ने बताया कि कई विषयों पर अभी असमंजस की स्थिति है, लेकिन शीघ्र सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी।