सास-ससुर ने माता-पिता बन किया बहू का कन्यादान, देवरों ने निभाईं भाई की रस्में; शाहपुर के परिवार ने पेश की मिसाल
कांगड़ा के शाहपुर में एक परिवार ने अपनी विधवा बहू को बेटी का दर्जा देकर पूरे रीति-रिवाज से उसका पुनर्विवाह कराया। सास-ससुर ने माता-पिता बनकर कन्यादान ...और पढ़ें

शाहपुर के चमंडेरा में बहू का कन्यादान करती सास।
HighLights
कांगड़ा के शाहपुर में परिवार ने विधवा बहू का पुनर्विवाह कराया।
सास-ससुर ने माता-पिता बनकर बहू का कन्यादान किया।
देवरों ने भाई की भूमिका निभाकर विवाह में सहयोग दिया।
संवाद सूत्र, शाहपुर (कांगड़ा)। बदलते दौर में जहां पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक मूल्यों पर अक्सर सवाल उठते हैं, वहीं हिमाचल में कांगड़ा जिले के शाहपुर उपमंडल के गांव चमंडेरा से मानवता, संवेदनशीलता और अपनत्व की ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। यहां एक परिवार ने अपनी विधवा बहू को बेटी का दर्जा देकर न केवल उसका सम्मान बनाए रखा, बल्कि पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ उसका पुनर्विवाह कर समाज के सामने नई सोच का उदाहरण पेश किया।
हादसे में हो गई थी पति की मौत
गांव चमंडेरा निवासी 29 वर्षीय रंजना कुमारी के पति राजिंदर कुमार का करीब डेढ़ वर्ष पहले एक सड़क दुर्घटना में असमय निधन हो गया था। पति के निधन के बाद रंजना के सामने जीवन की बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गईं।
सास-ससुर ने दिया साथ
कठिन समय में उनके ससुर ईश्वर दास और सास विमला देवी ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। उन्होंने रंजना को बहू नहीं, बल्कि अपनी बेटी मानते हुए हर कदम पर साथ दिया और उसके भविष्य को सुरक्षित बनाने का निर्णय लिया।
सास-ससुर ने माता-पिता बनकर किया कन्यादान
परिवार ने सामाजिक रूढ़ियों और पुरानी सोच से ऊपर उठकर रंजना का पूरे सम्मान के साथ पुनर्विवाह करवाया। विवाह समारोह में ससुर ईश्वर दास और सास विमला देवी ने माता-पिता की भूमिका निभाते हुए स्वयं कन्यादान की रस्म अदा की। यह भावुक पल वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का विषय बन गया।
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देवरों ने निभाया भाई का दायित्व
इस नेक पहल में परिवार के अन्य सदस्यों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रंजना के देवर इंद्र कुमार और सुरेंद्र पाल ने बड़े भाई का दायित्व निभाते हुए विवाह की सभी तैयारियों और व्यवस्थाओं में बढ़-चढ़कर सहयोग किया। विदाई के समय उन्होंने रंजना को नए जीवन की शुरुआत के लिए आवश्यक घरेलू सामान भेंट कर सम्मानपूर्वक विदा किया।
समाज को दिया संदेश
परिवार की यह पहल केवल एक पुनर्विवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश देती है कि विधवा पुनर्विवाह सम्मान, समानता और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक है। यदि परिवार साथ खड़ा हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी किसी महिला को नया जीवन और नया आत्मविश्वास मिल सकता है।
आज चमंडेरा का यह परिवार इस बात का जीवंत उदाहरण बन गया है कि रिश्तों की असली पहचान केवल खून के संबंधों से नहीं होती, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान और अपनत्व से होती है। उनकी यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव और नई सोच की प्रेरणा बनकर उभरी है।
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