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    सुजानपुर होली महोत्सव: यहां 200 साल से मनाया जा रहा रंगोत्सव, भगवान कृष्ण को गुलाल लगाने की है खास परंपरा

    By Ranbir Thakur Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sun, 01 Mar 2026 10:54 AM (IST)

    हमीरपुर के सुजानपुर टीहरा में 200 साल से अधिक समय से ऐतिहासिक होली महोत्सव मनाया जा रहा है। महाराजा संसार चंद ने 1794 में मुरली मनोहर मंदिर बनवाया और ...और पढ़ें

    सुजानपुर होली महोत्सव के लिए सजा मुरली मनोहर मंदिर। जागरण

    सुजानपुर होली महोत्सव के लिए सजा मुरली मनोहर मंदिर। जागरण

    HighLights

    1. महाराजा संसार चंद ने सुजानपुर होली महोत्सव शुरू किया।

    2. मुरली मनोहर मंदिर से भगवान कृष्ण को गुलाल लगाकर आगाज।

    3. राज्य के मुखिया द्वारा उत्सव का उद्घाटन किया जाता है।

    जागरण टीम, सुजानपुर (हमीरपुर)। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में होली पर्व को बड़े महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक होली महोत्सव सुजानपुर टीहरा के शुभारंभ का श्रेय महाराजा संसार चंद 1775-1823 ई. को जाता है। कलाप्रेमी महाराजा संसार चंद ने 1794 ई. में मुरली मनोहर मंदिर सुजानपुर का निर्माण कार्य शुरू करवाया, जो 1796 ई. में संपूर्ण हुआ। भगवान कृष्ण को रंग लगाने पर ही होली उत्सव का आगाज होता है। यहां पहली से 4 मार्च तक होली महोत्सव मनाया जाएगा।

    मंदिर के निर्माण कार्य के पूर्ण होने के अवसर पर महाराजा संसार चंद ने भव्य होली महोत्सव का आयोजन करवाया और प्रजा के साथ होली खेली। 

    होली के नजदीक आते ही रंगों से भर जाता है सरोवर 

    टीहरा स्थित बारादारी के प्रांगण में एक सरोवर का निर्माण किया गया, जिसे होली के अवसर पर जल, विविध सुगंधित द्रव्यों एवं रंगों से भर जाता था। राजा यहां अपने परिवार के सदस्यों से होली खेलने के उपरांत ऐतिहासिक चौगान सुजानपुर में आकर संपूर्ण राप्रशासन प्रजा के साथ होली खेलते थे। 

    बनवाया था मुरली मनोहर मंदिर 

    महाराजा संसार चंद द्वारा बसाया गया मुरली मनोहर मंदिर सुजानपुर शहर में अपनी ही गाथा बयान करता है। वर्तमान में यह शहर सुजानपुर टिहरा के नाम से जाना जाता है। इस शहर में बने मंदिर महाराजा संसार चंद की ही देन है। जिसमें सुजानपुर चौगान के साथ बनाया गया मुरली मनोहर मंदिर महाराजा संसार चंद ने अपनी रानी प्रश्नों देवी की याद में बनाया था। जिसे बनाने के लिए 100000 रुपये लगे थे।

    भगवान कृष्ण को गुलाल लगाने के बाद होता है आगाज

    दंतकथा के अनुसार इस मंदिर को लखे दा मंदिर भी कहा जाता है। होली उत्सव आते ही इस मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया जाता है और प्राचीन समय से इसी मंदिर से होली उत्सव का आगाज किया जाता है। होली उत्सव के दिन भगवान कृष्ण को गुलाल लगाकर होली मेले का आगाज करते हैं। पुराने समय में महाराजा संसार चंद अपनी प्रजा के साथ होली इसी मंदिर के साथ खेलना शुरू करते थे। होली उत्सव की शुरुआत महाराजा संसार चंद के समय से ही शुरू की गई है।

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    प्रदेश का मुखिया करता है उत्सव का आगाज

    वर्तमान में भी प्रदेश का मुखिया होली उत्सव का आगाज करता है और समापन प्रदेश के राज्यपाल द्वारा किया जाता है। यह प्रथा यतायत आने वाली पीढ़ियों ने जारी रखी है। 

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