Himachal Cloudburst: फ्लड आ रहा है... भागो, फरिश्ता बनकर आई महिला ने बचा लिए 12 परिवार; पलभर में सब हो गया तबाह
हिमाचल प्रदेश के शाहपुर की बोह घाटी में बादल फटने से 18 घर और एक स्कूल बह गया। राणो देवी नामक महिला की सतर्कता से 12 परिवारों की जान बच गई, जिन्होंने ...और पढ़ें

शाहपुर की बोह घाटी में बादल फटने से हुई तबाही और लोगों को सतर्क करने वाली महिला राणो देवी। जागरण
HighLights
बोह घाटी में बादल फटने से 18 घर और स्कूल बहे।
राणो देवी की सतर्कता से 12 परिवारों की जान बची।
मलबे और पानी के सैलाब से गांव में भारी तबाही हुई।
सोनू ठाकुर, शाहपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में शाहपुर की बोह घाटी में बादल फटने से 18 घर और स्कूल भवन बह गया। एक महिला की सतर्कता से जानी नुकसान नहीं हुआ, अन्यथा कई लोगों की जान पर बन सकती थी। बोह घाटी के गड़गून गांव में हर तरफ वर्षा की आवाज थी। लोग अपने-अपने घरों में थे। तभी घर के बाहर खड़ी राणो देवी की नजर गांव के साथ बहने वाले नाले पर पड़ी। नाले का पानी अचानक मटमैला दिखाई दिया।
यह दृश्य देखते ही चार साल पहले बोह घाटी में बादल फटने से हुई तबाही उनकी आंखों के सामने ताजा हो गई, तब 10 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी और छह के करीब घर मलबे में समा गए थे। राणो देवी को अहसास हो गया कि इस बार भी कोई अनर्थ होने वाला है।

चीखें सुनते ही अलर्ट हुए लोग
उन्होंने एक पल भी नहीं गंवाया। वह पूरी ताकत से गांव की गलियों में चिल्लाने लगीं..."भागो...। नाले में मलबा आ रहा है... जान बचाओ...।" उनकी चीख सुनकर लोग घरों से बाहर निकले। किसी ने बच्चों को गोद में उठाया, किसी ने बुजुर्गों का हाथ पकड़ा और सभी सुरक्षित जगह की ओर दौड़ पड़े।
पलभर में सैलाब सबकुछ बहा ले गया
चेतावनी के कुछ ही मिनट बाद प्रकृति ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि पूरा गांव सहम गया। मलबे और पानी का विकराल सैलाब देखते ही देखते घरों, पशुशालाओं और मवेशियों को अपने साथ बहा ले गया। खेत मलबे में दब गए और गांव का आधा हिस्सा तबाह हो गया।
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कुछ भी निकालने का मौका नहीं मिल पाया
लोगों को अपने घरों से कपड़े, गहने, राशन, नकदी या पशुओं तक को निकालने का मौका नहीं मिला। वर्षों की मेहनत और जीवनभर की जमा-पूंजी कुछ ही मिनटों में मलबे में समा गई।

राणो देवी का छलका दर्द
आंखों में आंसू लिए राणो देवी कहती हैं कि यदि उस समय उन्होंने लोगों को आवाज न दी होती, तो शायद यह हादसा सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहता।
लोग बोले- वह फरिश्ते से कम नहीं
गांव के लोग भी मानते हैं कि उस सुबह राणो देवी की आवाज उनके लिए किसी फरिश्ते की पुकार से कम नहीं थी। आज भले ही कई परिवारों का आशियाना उजड़ गया हो, लेकिन करीब 12 घरों के लोगों की सांसें इसलिए चल रही हैं क्योंकि एक महिला ने समय रहते खतरे को पहचान लिया और पूरे गांव को जगा दिया।
स्पैड़ा गांव में 6 घर हुए तबाह
बोह घाटी के स्पैड़ा गांव में छह घर तबाह हुए हैं। यहां भी नाले में आई बाढ़ ने तबाही मचाई है। दोनों गांव साथ-साथ लगते हैं।
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