हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में अब मजिस्ट्रेट सुनेंगे न्यायिक मामले, बीडीओ और पंचायत सचिवों को नहीं मिली न्यायिक शक्तियां
हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमाणपत्र और रिपोर्ट जारी करने की व्यवस्था बदल गई है। आवश्यक दस्तावेज ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश की पंचायतों में न्यायिक मामलों की जांच अब मजिस्ट्रेट करेंगे।
HighLights
प्रधानों के अधिकार 1 फरवरी, 2026 से समाप्त।
प्रमाणपत्र अब ब्लॉक अधिकारी, पंचायत सचिव जारी करेंगे।
न्यायिक मामले सीधे संबंधित मजिस्ट्रेट के पास जाएंगे।
साहिल ठाकुर, जसवां परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमाणपत्र और रिपोर्ट जारी करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा की ओर से जारी आदेशों के अनुसार 1 फरवरी, 2026 से निर्वाचित प्रधानों के अधिकार समाप्त हो गए हैं।
अब जनता को अपने आवश्यक दस्तावेजों के लिए सीधे ब्लाक स्तर के अधिकारियों और पंचायत सचिवों से संपर्क करना होगा।
दैनिक जागरण ने सात फरवरी को प्रमाणपत्रों, न्यायिक शक्तियों पर सचिवों में असमंजस शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में प्रधानों की ओर से दी जाने वाली चरित्र प्रमाण पत्र जैसी रिपोर्ट और विभिन्न प्रकार के सत्यापन अब पंचायत के उपलब्ध रिकार्ड के आधार पर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) और पंचायत सचिव की ओर से गठित समिति की ओर से किए जाएंगे।
यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में आम जनता के प्रशासनिक कार्य न रुकें और उन्हें समय पर सुविधाएं मिल सकें।
मजिस्ट्रेट के पास जाएंगे न्यायिक मामले
इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के तहत न्यायिक कार्यों के संचालन में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। चूंकि वर्तमान में पंचायतों में कोई निर्वाचित प्रतिनिधि मौजूद नहीं है, इसलिए न्यायिक कार्यों के लिए गठित होने वाली बेंच अब कार्यशील नहीं रहेगी। ऐसी स्थिति में सरकार की ओर से गठित समिति के अध्यक्ष को यह निर्देश दिए हैं कि वे न्यायिक मामलों को आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट के पास भेजें।
सभी बीडीओ व पंचायत अधिकारियों को निर्देश
विभाग ने प्रदेश के सभी जिला पंचायत अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं। बीडीओ और पंचायत सचिव न्यायिक मामलों को नहीं सुन पाएंगे।
क्या रहेगी व्यवस्था
खंड विकास अधिकारी परागपुर अशोक कुमार ने बताया कि राजस्व मामले संबंधित तहसीलदार सुनेंगे जबकि फौजदारी, दीवानी तथा अन्य मामलों के समाधान के लिए आवेदकों को संबंधित मजिस्ट्रेट के पास भेजा जाएगा।
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