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    'काम निकल गया तो भूल गई सरकार...', 21 साल तक पाकिस्तान की जासूसी करने वाले मंगाराम का छलका दर्द

    Updated: Tue, 16 Jun 2026 10:21 AM (IST)

    देश के लिए 1984 से 2005 तक पाकिस्तान में जासूसी करने वाले 66 वर्षीय मंगाराम को सरकार से न आर्थिक सहायता मिली और न ही कोई शौर्य पुरस्कार। ...और पढ़ें

    21 साल तक पाकिस्तान में जासूसी करने वाले मंगाराम का छलका दर्द (जागरण फोटो)

    21 साल तक पाकिस्तान में जासूसी करने वाले मंगाराम का छलका दर्द (जागरण फोटो)

    HighLights

    1. मंगाराम ने 1984 से 2005 तक पाकिस्तान में जासूसी की।

    2. उन्हें सरकार से कोई आर्थिक सहायता या शौर्य पुरस्कार नहीं मिला।

    3. निराश मंगाराम ने अब अपनी व्यथा मीडिया के माध्यम से बताई।

    जागरण संवाददाता, ढांगूपीर। देश के लिए जान को खतरे में डालकर जासूसी करने वाले 66 वर्षीय मंगाराम, पुत्र इंद्र सिंह, निवासी तहसील इंदौरा, को भारत सरकार से न तो कोई आर्थिक सहायता मिली है और न ही उसे कोई शौर्य पुरस्कार। मंगाराम ने सोमवार को जानकारी देते कहा कि 1984 से लेकर 2005 तक वह देश के लिए जासूसी करता रहा और दुश्मन देश पाकिस्तान के घर में जाकर उसे चुनौती देता रहा।

    35 साल देश को दिए

    उसने आर्थिक सहायता के लिए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, रक्षामंत्री, गृहमंत्री और हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्रियों को कई पत्र लिखे, लेकिन किसी ने भी उसे राहत दिलवाने का प्रयास नहीं किया।

    निराश होकर उसे अब दैनिक जागरण के माध्यम से मीडिया का सहारा लेना पड़ा है। मंगाराम ने बताया कि उसने अपने जीवन के 35 वर्ष देश को दिए। गोलियों की परवाह किए बिना दुश्मन को रोका और दुश्मन देश के गढ़ में जाकर अपने वतन के लिए काम करता रहा।

    सरकार ने उससे वादा किया था कि उसे उचित आर्थिक सहायता और शौर्य पुरस्कार दिए जाएंगे, लेकिन सरकार ने अपना काम निकालने के बाद उसे भुला दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उसके साथ ऐसा हुआ है, तो फिर वतन के लिए काम करने के लिए कौन आगे आएगा।

    जासूसों का मान-सम्मान होना चाहिए

    मंगाराम ने कहा कि अन्य देशों की सरकारें अपने जासूसों का पूरा मान-सम्मान करती हैं और उन्हें शौर्य पुरस्कार देती हैं, लेकिन भारत में अजीब माहौल देखने को मिल रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से मिलने की इच्छा जताई, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि वे मिलने के लिए समय देंगे।

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