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    हिमाचल: कांगड़ा में गांवों के विकास को मिलेगी रफ्तार, 232 पंचायतों के लिए 300 करोड़ रुपये मंजूर

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 07:49 AM (IST)

    कांगड़ा जिले में ग्रामीण विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 232 पंचायतों में 16,064 कार्यों हेतु 300.32 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं वित्तीय स ...और पढ़ें

    हिमाचल: कांगड़ा में गांवों के विकास को मिलेगी रफ्तार (File Photo)

    हिमाचल: कांगड़ा में गांवों के विकास को मिलेगी रफ्तार (File Photo)

    HighLights

    1. कांगड़ा में 232 पंचायतों के लिए 300 करोड़ स्वीकृत

    2. 16,064 विकास कार्य 31 मार्च 2027 तक पूरे होंगे

    3. श्रमिकों को विस्थापित करने वाली मशीनरी पर प्रतिबंध

    जागरण संवाददाता, कांगड़ा। जिला कांगड़ा में ग्रामीण विकास विभाग के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वीबीजी रामजी के तहत बड़े पैमाने पर विकास कार्यों को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई है।

    डीसी हेमराज वैरवा की ओर से जारी आदेश के अनुसार, जिले की 232 पंचायतों में 16,064 कार्यों के लिए 300.32 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है।

    यह राशि वार्षिक एवं अतिरिक्त कार्यों के लिए प्रदान की गई है। स्वीकृत कार्यों को संबंधित कार्यक्रम अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों के माध्यम से निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरा किया जाएगा और इन्हें 31 मार्च, 2027 तक समाप्त करना है।

    किस विकास खंड के लिए कितने रुपये?

    स्वीकृत राशि और कार्यों के मामले में लंबागांव विकास खंड सबसे आगे है, जहां 51 पंचायतों में 3,738 कार्यों के लिए 68.69 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।

    नगरोटा बगवां विकास खंड में 35 पंचायतों के 3,430 कार्यों के लिए 67.37 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। धर्मशाला विकास खंड की 31 पंचायतों में 2,355 कार्यों के लिए 46.10 करोड़ रुपये, जबकि देहरा की 59 पंचायतों में 3,397 कार्यों के लिए 45.84 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। फतेहपुर विकास खंड में 35 पंचायतों के 2,040 कार्यों के लिए 51.27 करोड़ रुपये तथा बड़ोह विकास खंड में 21 पंचायतों के 1,106 कार्यों के लिए 21.05 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।

    श्रमिकों को विस्थापित करने वाली मशीनरी पर प्रतिबंध

    आदेश में यह स्पष्ट किया है कि प्रत्येक कार्ययोजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही किया जाएगा और कार्य शुरू करने से पहले तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करना आवश्यक होगा। वन संरक्षण अधिनियम के प्रविधान का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। उल्लंघन की स्थिति में संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी जिम्मेदार होगी। ठेकेदारों और श्रमिकों को विस्थापित करने वाली मशीनरी के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है।

    प्रत्येक कार्यस्थल पर स्थायी सूचना पट्ट लगाना अनिवार्य होगा, जिसमें कार्य का नाम, स्वीकृत राशि, व्यय की गई राशि और निर्माण वर्ष सहित आवश्यक विवरण प्रदर्शित करना होगा।

    योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार मजदूरी और सामग्री का अनुपात 60:40 बनाए रखना आवश्यक है। इस प्रकार, कांगड़ा जिले में स्वीकृत 16,064 विकास कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। जिला विकास अधिकारी अभिनीत कात्यान शर्मा ने इस बाबत पुष्टि की है।

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