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    'खतरनाक ऑपरेशन से सुरक्षित लौटे, हिमाचल की बदहाल सड़क ने ले ली जान', मरीन कमांडो की हादसे में मौत पर बहन ने उठाए सवाल

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Tue, 07 Jul 2026 01:49 PM (IST)

    मरीन कमांडो अमित सिंह राणा की सड़क हादसे में मौत के बाद उनके परिवार ने हिमाचल की पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। बहन पंकज ने मुख्यमंत्री को ...और पढ़ें

    मरीन कमांडो अमित सिंह राणा की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

    मरीन कमांडो अमित सिंह राणा की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।

    HighLights

    1. शौर्य चक्र विजेता मरीन कमांडो अमित सिंह राणा की मौत।

    2. परिवार ने हिमाचल की पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा पर सवाल उठाए।

    3. बहन ने सीएम से क्रैश बैरियर लगाने की मांग की।

    जागरण संवाददाता, धर्मशाला। शौर्य चक्र विजेता और भारतीय नौसेना के एलीट मरीन कमांडो (मार्कोस) अमित सिंह राणा की सड़क हादसे में मौत के बाद उनके परिवार ने हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कमांडो की बड़ी बहन पंकज ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्य सचिव और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को ईमेल भेजकर राज्य की सभी खतरनाक पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा उपाय मजबूत करने की मांग की है। 

    पंकज ने अपने पत्र में लिखा कि उनके भाई ने दुनिया के सबसे कठिन सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा किया था और कई जोखिम भरे आतंकवाद-विरोधी अभियानों का सामना किया था, लेकिन दुखद विडंबना यह है कि उनकी जान एक असुरक्षित सड़क पर चली गई।

    खस्ताहाल सड़क ने ले ली जान

    उन्होंने कहा कि जो सैनिक सबसे कठिन सैन्य प्रशिक्षण और खतरनाक ऑपरेशन से सुरक्षित लौट आया हो, उसकी जान एक असुरक्षित सड़क की वजह से नहीं जानी चाहिए। यदि वहां मजबूत क्रैश बैरियर और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होते, तो शायद मेरे भाई की जान बच सकती थी।

    500 फीट गहरी खाई में जा गिरी थी कार

    बता दें कि 2 जून को कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी क्षेत्र में खुंडियां लगडू सड़क पर अमित सिंह राणा की कार अनियंत्रित होकर करीब 500 फीट गहरी खाई में गिर गई थी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 

    परिवार का इकलौता सहारा थे अमित राणा

    32 वर्षीय अमित सिंह राणा के निधन से माता-पिता, पत्नी, तीन वर्षीय बेटा और दो बहनें बेहद दुखी हैं। वे सेवानिवृत्त सैनिक केवल सिंह राणा के इकलौते पुत्र थे।

    ...तो बच सकती हैं अनमोल जानें

    परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकना है। पंकज ने कहा कि हिमाचल की कई लिंक और ग्रामीण सड़कें आज भी पर्याप्त सुरक्षा सुविधाओं से वंचित हैं। यदि सरकार समय रहते इन मार्गों पर क्रैश बैरियर, चेतावनी संकेत और अन्य सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करे तो कई अनमोल जानें बचाई जा सकती हैं।

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