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नेपाल त्रासदी ने हिमालयी राज्यों को दी चेतावनी, हिमाचल के कांगड़ा जिले ने कब-कब झेले आपदा के जख्म; कितनी है तैयारी?

By Neeraj Vyas Edited By: Rajesh Sharma
Updated: Tue, 01 Sep 2026 06:31 AM (IST)

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी राज्यों को आपदा प्रबंधन मजबूत करने की चेतावनी दी है। हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा ...और पढ़ें

जिला कांगड़ा में शाहपुर की बोह घाटी में बाढ़ व भूस्खलन से हुआ नुकसान। जागरण आर्काइव

जिला कांगड़ा में शाहपुर की बोह घाटी में बाढ़ व भूस्खलन से हुआ नुकसान। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. नेपाल की बाढ़ ने हिमालयी राज्यों को चेतावनी दी।

  2. कांगड़ा में बादल फटने से कई बार तबाही हुई।

  3. आपदा प्रबंधन और निगरानी तंत्र मजबूत करना होगा।

नीरज व्यास, धर्मशाला। त्रासदी जब भी आती है, गहरे जख्म देकर जाती है। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते आपदा खतरे की ओर ध्यान खींचा है। लोगों की जान जाने, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लापता होने तथा करोड़ों की संपत्ति के बह जाने के बाद अब समय है कि पड़ोसी देश की इस त्रासदी से सबक लिया जाए। सुरक्षित भविष्य के लिए हिमालयी राज्यों को आपदा प्रबंधन और निगरानी की रणनीति को नए सिरे से मजबूत करना होगा।

प्रकृति से लगातार हो रही छेड़छाड़, जंगलों का कटाव, नदी-नालों के किनारे बढ़ता निर्माण और बहुमंजिला इमारतों का तेजी से फैलता जाल आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा बढ़ा रहा है। बादल फटना, अचानक नदियों का जलस्तर बढ़ना, ग्लेशियर का टूटना, पहाड़ों से पत्थर गिरना या भूस्खलन जैसी घटनाएं महज संयोग नहीं हैं। इनके पीछे बदलता पर्यावरण, कमजोर भू-भाग और मानवीय हस्तक्षेप जैसे कई कारण जुड़े हैं।

कांगड़ा भी देख चुका तबाही

कांगड़ा जिला भी ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का दर्द झेल चुका है। 22 सितंबर 2022 को खनियारा के घुरलू नाले में बादल फटने से कई घर और दुकानें मलबे की चपेट में आ गई थीं। खनियारा बाजार से लेकर फाटी और हलमा तक तबाही का मंजर दिखा था। कई घर मलबे से भर गए और करीब 15 घरों को नुकसान पहुंचा। इस दौरान एक छोटा बच्चा भी मलबे में बह गया था, जिसे उसके पिता ने जान जोखिम में डालकर बचाया।

इसके बाद 25 जून 2025 को मनूनी खड्ड में बादल फटने से आई बाढ़ ने आठ मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया। एसडीआरएफ और पुलिस की टीमों ने लंबे समय तक सर्च अभियान चलाया। पांच मजदूरों के शव बरामद किए गए, जबकि तीन लापता रहे। मौके पर गलत डंपिंग और मशीनरी से हुए अवैज्ञानिक खनन ने नुकसान को और बढ़ा दिया।

अब हिमालय आपदा निगरानी तंत्र मजबूत करने की जरूरत

नेपाल की त्रासदी चेतावनी है कि आपदा आने का इंतजार करने के बजाय पहले से तैयारी करनी होगी। ग्लेशियर, नदियों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों की निगरानी के लिए आधुनिक तंत्र विकसित करना होगा। नदी-नालों से सुरक्षित दूरी पर निर्माण, वैज्ञानिक तरीके से विकास कार्य और जंगलों का संरक्षण समय की मांग है।

नेपाल त्रासदी से दुखी हैं लोग

कांगड़ा जिला धर्मशाला में रहने वाले नेपाली व गोरखाली परिवार नेपाल त्रासदी से दुखी है। वह नेपाल त्रासदी में मरे लोगों के लिए शांति व बचे लोगों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। कैप्टन लव कुमार छेत्री व कैप्टन शिवराज थापा ने बताया कि जो वीडियो इंटरनेट पर त्रासदी का 
वायरल हुआ है वह डराने वाला है। भगवान सभी को सकुशल रखे। 

आपदा से निपटने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित है। टोल फ्री नंबर जारी हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ प्रशासनिक और स्थानीय टीमें राहत-बचाव कार्य में जुटती हैं। समय-समय पर माकड्रिल, अभ्यास और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
-हेमराज बैरवा, उपायुक्त, कांगड़ा।

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