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    हिमाचल के टांडा अस्पताल में पित्त की नली के कैंसर की सफल रोबोटिक सर्जरी, 9 घंटे के ऑपरेशन ने दी महिला को नई जिंदगी

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Wed, 25 Mar 2026 03:00 PM (GMT+05:30)

    टांडा मेडिकल कॉलेज में पित्त की नली के कैंसर से जूझ रही चंबा की एक 62 वर्षीय महिला की सफलतापूर्वक रोबोटिक व्हिपल सर्जरी की गई। डॉ. अंकित शुक्ला के नेत ...और पढ़ें

    कांगड़ा में टांडा स्थित डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल। जागरण आर्काइव

    कांगड़ा में टांडा स्थित डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. टांडा मेडिकल कॉलेज में पहली रोबोटिक व्हिपल सर्जरी हुई।

    2. पित्त की नली के कैंसर का सफल उपचार किया गया।

    3. मरीज को 10 दिन में स्वस्थ छुट्टी मिल गई।

    संवाद सहयोगी, कांगड़ा। कैंसर रोगियों को रोबोटिक सर्जरी से अब काफी सुविधा मिल रही है। डा. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कांगड़ा स्थित टांडा में पित्त की नली के कैंसर से जूझ रही महिला की रोबोटिक सर्जरी की गई है। रोबोटिक व्हिपल प्रक्रिया (पैंक्रियाटिकोडुओडेनेक्टामी) से टांडा मेडिकल कालेज में पहली बार हुई। चंबा निवासी महिला अब स्वस्थ है। आपरेशन के 10 दिन बाद मंगलवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    दो महीने पहले हुआ था पेटदर्द

    चंबा निवासी 62 वर्षीय महिला को दो महीने पहले पेट में दर्द हुआ। वह पीलिया से भी पीड़ित थी। टांडा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में जांच के बाद पता चला कि उसे पित्त की नली में कैंसर है। सभी तरह के टेस्ट करवाने के बाद विशेषज्ञों ने रोबोटिक व्हिपल सर्जरी करने का निर्णय लिया।

    9 घंटे की मशक्कत के बाद सफल ऑपरेशन

    सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलाजिस्ट डा. अंकित शुक्ला ने सर्जन डा. मुकेश व टीम के साथ मिलकर नौ घंटे में महिला का आपरेशन किया। सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया टीम की अहम भूमिका रही। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डा. श्याम भंडारी, डा. भानु गुप्ता ने टीम के साथ सहयोग किया। तकनीकी चुनौतियों के बावजूद सर्जरी बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरी की गई। मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और सर्जरी के 10वें दिन उसे स्थिर स्थिति में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    इसलिए अपनाई रोबोटिक व्हिपल प्रक्रिया

    विशेषज्ञों के मुताबिक पित्त की नली अग्नाशय से होते हुए छोटी आंत में खुलती है। अग्नाशय के कैंसर के आपरेशन लिए भी रोबोटिक व्हिपल प्रक्रिया प्रक्रिया अपनाई जाती है। यह प्रक्रिया आधुनिक और सुरक्षित है। रक्तस्रात कम होता है और मरीज जल्दी ठीक होता है।

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    क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    ओपन सर्जरी (चीरा लगाकर) में रक्तस्राव अधिक होता है। मरीज को ठीक होने में भी अधिक समय लगता है। मरीज को अस्पताल में दो से तीन सप्ताह तक रुकना पड़ता है। रोबोटिक व्हिपल प्रक्रिया एडवांस व सुरक्षित विकल्प है। इसमें छोटे चीरे के कारण रक्तस्राव कम होता है। सर्जरी के बाद दर्द कम होने के साथ मरीज तेजी से ठीक होता है। मरीज को अस्पताल में कम समय तक रुकना पड़ता है।
    -डा. अंकित शुक्ला, सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलाजिस्ट टांडा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल।

    यह नया कीर्तिमान

    सर्जिकल उत्कृष्टता के क्षेत्र में नया कीर्तिमान बनाने के लिए पूरी टीम को बधाई। उम्मीद है कि यह मील का पत्थर इस क्षेत्र में जटिल हेपेटोबिलियरी और अग्नाशय से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए नए रास्ते खोलेगा, जिससे मरीजों को इलाज के लिए दूरदराज के विशिष्ट चिकित्सा केंद्रों तक जाने की आवश्यकता कम होगी।
    -डा. मिलाप शर्मा, प्राचार्य, टांडा मेडिकल मेडिकल कालेज एवं अस्पताल।

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