हिमाचल में 88 फार्मा इकाइयों को प्रोडक्शन रोकने का नोटिस, दवाओं का कई बार सैंपल फेल होने पर लिया संज्ञान
हिमाचल प्रदेश में राज्य दवा नियंत्रक ने 88 फार्मा इकाइयों को उत्पादन रोकने के नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई दवाओं के बार-बार गुणवत्ता जांच में फेल ह ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के बद्दी में स्थित विभिन्न फार्मा इकाइयां। जागरण आर्काइव
HighLights
88 फार्मा इकाइयों को उत्पादन रोकने के नोटिस जारी।
दवाओं के सैंपल बार-बार गुणवत्ता जांच में फेल।
संशोधित शेड्यूल-एम और जीएमपी मानकों का पालन अनिवार्य।
सुनील शर्मा, सोलन। दवाओं की गुणवत्ता को लेकर लगातार उठ रहे प्रश्नों के बीच हिमाचल प्रदेश में राज्य दवा नियंत्रक ने 88 फार्मा इकाइयों को उत्पादन रोकने के नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई उन इकाइयों पर की गई है, जिनकी दवाओं के सैंपल बार-बार जांच में फेल पाए गए और निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे। इन उद्योगों में फिलहाल दवा उत्पादन बंद कर दिया गया है।
उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब तक वे सभी आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करते, तब तक उत्पादन शुरू नहीं किया जा सकेगा। सोलन जिले के बद्दी, सिरमौर व कांगड़ा की कंपनियों को नोटिस दिए गए हैं।
संशोधित मानकों का करना होगा पालन
राज्य दवा नियंत्रक कार्यालय के अनुसार एक वर्ष के दौरान यह कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन उद्योगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रेक्टिस (जीएमपी) और संशोधित शेड्यूल-एम के मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। इसका मुख्य उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हिमाचल एशिया का प्रमुख फार्मा हब
हिमाचल एशिया के प्रमुख फार्मा हब में से एक है, जहां बड़ी संख्या में दवा निर्माता इकाइयां संचालित हैं। यही कारण है कि केंद्रीय स्तर पर जारी होने वाले मासिक ड्रग अलर्ट में दवाओं के अधिक सैंपल गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरे हैं।
73 दवाओं के सैंपल हुए थे फेल
23 मार्च को जारी फरवरी के ड्रग अलर्ट में देशभर की 198 दवाएं गुणवत्ता पर खरी नहीं उतरी थीं। उनमें से 73 दवाएं हिमाचल के उद्योगों में बनी थीं।
संशोधित शेड्यूल-एम लागू करने से बढ़ा दवाब
केंद्र सरकार के संशोधित शेड्यूल-एम लागू करने के बाद फार्मा उद्योगों पर गुणवत्ता मानकों को लेकर दबाव बढ़ा है। कई छोटी और मध्यम इकाइयों को उक्त मानकों के अनुरूप अपने आधारभूत ढांचा और प्रक्रियाओं में सुधार करने में दिक्कत आई हैं। केंद्रीय और राज्य स्तर की संयुक्त टीमें संदिग्ध इकाइयों का निरीक्षण कर रही हैं। जिन उद्योगों में खामियां पाई जा रही हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है। इस सख्ती के बाद प्रदेश के फार्मा सेक्टर में हड़कंप है।
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क्या कहते हैं राज्य दवा नियंत्रक
दवाओं की गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिन इकाइयों के सैंपल बार-बार फेल हो रहे थे, उनको उत्पादन रोकने के लिए नोटिस जारी किए हैं। अब उन्हें सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही उत्पादन की अनुमति दी जाएगी। यदि कोई इकाई नोटिस के बावजूद उत्पादन करती पाई जाती है, तो लाइसेंस रद किया जाएगा।
-डा. मनीष कूपर, राज्य दवा नियंत्रक, हिमाचल प्रदेश।
तीन वर्ष में दवाओं के 2315 सैंपल हुए फेल
हिमाचल प्रदेश में पिछले तीन वर्षों में निर्मित 2315 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। जिन दवा कंपनियों के सैंपल बार-बार फेल हो रहे हैं, उनके विरुद्ध सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है। शिमला स्थित प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया के प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने यह जानकारी दी। सरकार ने बताया कि ऐसी कंपनियों को चेतावनी जारी की जाती है और उत्पादन बंद करने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं।
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