कुल्लू में लैंडस्लाइड के बाद बन रही झील मचा सकती है तबाही, पार्वती नदी किनारे बसे गांवों पर मंडराया खतरा
कुल्लू की सैंज घाटी के जीवानाला में भारी भूस्खलन के कारण नदी में मलबा गिरने से झील का आकार बढ़ गया है, जिससे पार्वती नदी के किनारे बसे गांवों पर बाढ़ ...और पढ़ें

कुल्लू में जीवानाला पर बनी कृत्रिम झील। जागरण
HighLights
जीवानाला में भारी भूस्खलन से नदी में झील का आकार बढ़ा।
पार्वती नदी किनारे बसे गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराया।
प्रशासन स्थिति पर लगातार निगरानी कर रहा, लोगों को सतर्क किया।
संवाद सहयोगी, कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में मानसून असर दिखाने लगा है। लगातार हो रही बारिश के बीच जिला कुल्लू में सैंज घाटी के जीवानाला क्षेत्र में एक बार फिर भारी भूस्खलन होने से क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया है। पिछले वर्ष इसी स्थान पर बादल फटने के बाद हुए भूस्खलन से हुरननाला में कृत्रिम झील बन गई थी। अब एक साल बाद फिर उसी जगह फिर बड़ी मात्रा में मलबा और चट्टानें गिरने से नदी की निकासी प्रभावित हुई है और झील का आकार लगातार बढ़ने लगा है। इससे निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार दो दिन से जारी बारिश के बाद शुक्रवार शाम अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा दरक गया। भारी मात्रा में मलबा नदी में गिरने से पानी का बहाव धीमा पड़ गया है। हालांकि इस बार नदी पूरी तरह अवरुद्ध नहीं हुई है, लेकिन मलबे का ढेर बढ़ने से पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। यदि वर्षा का सिलसिला जारी रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पिछले साल तीन लोगों की गई थी जान
पिछले वर्ष 25 जून को इसी क्षेत्र में बादल फटने से आई भीषण आपदा में तीन लोगों की मौत हुई थी, छह मकान बह गए थे और करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ था। उस त्रासदी के निशान आज भी क्षेत्र में मौजूद हैं। अब उसी स्थान पर फिर भूस्खलन होने से लोगों में पुराने हादसे की यादें ताजा हो गई हैं।
पार्वती नदी किनारे बसे गांव खतरे में
जीवानाला झील का आकार बढ़ने से जीवा, शरण, बिहाली, सैंज बाजार, खराहल, बशाहल, देहुरी, सपंगनी, तलाड़ा तथा पार्वती नदी के किनारे बसे कई गांवों पर संभावित बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से लगातार निगरानी रखने और समय रहते आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की है।
क्या कहता है प्रशासन
एसडीएम बंजार पंकज शर्मा ने बताया कि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। एनएचपीसी और संबंधित विभागों को नियमित निगरानी तथा संवेदनशील क्षेत्रों का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और लोगों से भी अफवाहों से बचने तथा प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की गई।