हिमाचल में पंचायत चुनाव के लिए इस जिले में प्रत्याशी उतारेगा तीसरा मोर्चा, प्रधान से लेकर जिला परिषद की तैयारी
हिमाचल प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले तीसरा मोर्चा सक्रिय हो गया है। पूर्व मंत्री डॉ. राम लाल मार्कंडेय ने घोषणा की कि मोर्चा लाहुल स्पीति में ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए तीसरे मोर्चा ने ताल ठोक दी है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
तीसरा मोर्चा लाहुल स्पीति में पंचायत चुनाव लड़ेगा।
पूर्व मंत्री मार्कंडेय ने सरकार के बजट पर सवाल उठाए।
जनजातीय योजना और विकास कार्यों की उपेक्षा का आरोप।
संवाद सहयोगी, कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले तीसरा मोर्चा सक्रिय हो गया है। तीसरे मोर्चा के नेताओं ने पंचायत चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारने का एलान कर दिया है। पूर्व मंत्री डा. राम लाल मार्कंडेय ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए घोषणा की कि लाहुल स्पीति में वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद तक तीसरा मोर्चा चुनाव मैदान में उतरेगा।
पूर्व मंत्री डा. राम लाल मार्कंडेय शनिवार को कुल्लू में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में जीत के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी और हर स्तर पर अपने प्रत्याशी उतारे जाएंगे।
ट्राइबल प्लान व्यवस्था के साथ छेड़छाड़
मार्कंडेय ने 30 मार्च को पारित बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें करीब चार हजार करोड़ रुपये कम पेश किए गए हैं, जो प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर संकेत देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1974-75 से लागू ट्राइबल प्लान व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ की गई है।
9 प्रतिशत हिस्सा मिलता था ट्राइबल को
पहले कुल बजट का 9 प्रतिशत हिस्सा जनजातीय क्षेत्रों को मिलता था, जिसमें पांगी-भरमौर को 36 प्रतिशत, लाहुल को 34 प्रतिशत और किन्नौर को 30 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था, लेकिन इस बार पारदर्शिता नहीं दिखी और ट्राइबल क्षेत्र की पुस्तक के बिना ही बजट पारित कर दिया गया।
जमीनी स्तर पर नई योजना नहीं मिली
उन्होंने कहा कि लाहुल को 302 करोड़ रुपये का बजट दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई नई योजना शुरू नहीं हुई है और केवल केंद्र का बजट ही मिल रहा है। सड़कों के लिए कोई प्रविधान नहीं किया गया, जिससे विकास कार्य ठप पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कोल्ड स्टोर के लिए स्वीकृत 3.50 करोड़ और सब्जी मंडी के लिए मंजूर 25 करोड़ रुपये भी खर्च नहीं किए गए या अन्यत्र डायवर्ट कर दिए गए।
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1500 रुपये सियासी जुमला
उन्होंने महिलाओं को 1500 देने के वादे को उन्होंने जुमला बताया और कहा कि हजारों की जगह केवल 218 परिवार ही बीपीएल सूची में रह गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में केवल ठेकेदारों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि आम जनता विकास से वंचित है। वहीं माइनारिटी फंड के 10 करोड़ रुपये वापस जाने को भी सरकार की विफलता बताया।