हिमाचल प्रदेश के मणिकर्ण में लगातार दरक रहा पहाड़, पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों के लिए बना खतरा
कुल्लू में मणिकर्ण-बरशेनी सड़क पर लगातार भूस्खलन हो रहा है, जिससे यात्रियों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। घटीगढ़ के पास पहाड़ से पत्थर औ ...और पढ़ें

जिला कुल्लू के मणिकर्ण में पहाड़ से गिर रहे मलबे को हटाती मशीनरी। जागरण
HighLights
मणिकर्ण-बरशेनी सड़क पर लगातार भूस्खलन से खतरा।
घटीगढ़ के समीप पहाड़ से पत्थर-मलबा गिरने से आवाजाही खतरनाक।
स्थानीय लोग स्थायी समाधान और सुरक्षा उपाय की मांग कर रहे।
संवाद सहयोगी, कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में मणिकर्ण-बरशेनी सड़क इन दिनों भारी भूस्खलन की चपेट में है। घटीगढ़ के समीप पहाड़ से लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण सड़क पर पत्थर और मलबा गिर रहा है, जिससे सैलानी और स्थानीय लोग जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। बुधवार को भी
हालात इतने गंभीर हैं कि किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। हालांकि लोक निर्माण विभाग ने दो दिनों के बाद सड़क को वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल कर दिया है, लेकिन अभी भी यहां से सफर करना खतरे से खाली नहीं है।
पहाड़ी का बड़ा हिस्सा हो चुका है अस्थिर
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश और बर्फबारी के बाद पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा अस्थिर हो चुका है। दिन-रात छोटे-बड़े पत्थर सड़क पर गिर रहे हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही बेहद खतरनाक हो गई है।
बावजूद इसके, इस मार्ग पर सैकड़ों वाहन रोजाना गुजरते हैं, जिनमें पर्यटक, स्कूली बच्चे, मरीज और आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोग शामिल हैं। कई बार वाहन चालकों को मलबा हटाकर स्वयं रास्ता बनाना पड़ता है।
सैलानियों में भी दहशत
सैलानियों में भी डर का माहौल है। मणिकर्ण बरशेनी की ओर जाने वाले श्रद्धालु व पर्यटक भय के साये में यात्रा कर रहे हैं। सड़क की बदहाली से पर्यटन पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। लोगों ने प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। केवल अस्थायी तौर पर मलबा हटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहाड़ी की ट्रीटमेंट, रिटेनिंग वाल और सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी है।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कभी भी भूस्खलन से जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता गोविंद ठाकुर का कहना है कि मार्ग को बहाल कर दिया है। इसके लिए एक मशीन मणिकर्ण में ही रखी गई है, ताकि मार्ग बंद होते ही इससे बहाल किया जा सके।