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    हिमाचल में बुरी शक्तियों को भगाने के लिए बर्फ में मशालें लेकर निकले लोग, मनाया गया हालडा पर्व

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Mon, 02 Feb 2026 01:14 PM (GMT+05:30)

    Himachal Pradesh Tradition, हिमाचल प्रदेश के लाहुल स्पीति की गाहर घाटी में ग्रामीणों ने भारी बर्फबारी के बीच पारंपरिक हालडा पर्व मनाया। इस उत्सव में ल ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश के लाहुल में हालडा उत्सव मनाते लोग।

    हिमाचल प्रदेश के लाहुल में हालडा उत्सव मनाते लोग।

    HighLights

    1. गाहर घाटी में भारी बर्फबारी के बीच हालडा पर्व मनाया गया।

    2. बुरी शक्तियों को भगाने के लिए जलती मशालें निकाली गईं।

    3. ग्रामीणों ने सुख-शांति और अच्छी फसल के लिए पूजा की।

    जागरण संवाददाता, मनाली। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहुल स्पीति के गाहर घाटी में ग्रामीणों ने भारी बर्फ के बीच परंपरागत श्रद्धा और उत्साह के साथ मुख्य पर्व हालडा मनाया। इस पर्व की गजब मान्यता है। लोग बुरी शक्तियों को भगाने के लिए जलती हुई मशाल लेकर घरों से निकलते हैं। 

    रात करीब नौ बजे भारी बर्फबारी के बीच “हालडा हो… हालडा हो…” के जयकारों से पूरी गाहर व पट्टन घाटी गूंज उठी। मान्यता अनुसार गाहर घाटी के अंतर्गत कारदंग, बरबोग, केलंग तथा यूरनाथ पंचायत क्षेत्र सहित समस्त पट्टन घाटी के लोगों ने मशाल हालडा निकालकर बुरी शक्तियों को दूर भगाया।

    बुरी शक्तियां भगाने के बाद ईष्ट देवताओं की पूजा 

    इस अवसर पर ग्रामीणों ने अपने ईष्ट देवी-देवताओं की विधिवत पूजा-अर्चना कर क्षेत्र में सभी की सुख-शांति, खुशहाली और अच्छी फसल की प्रार्थना की। कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता से गाहर घाटी में हालडा पर्व पारंपरिक उल्लास और सामूहिक एकता के साथ मनाया गया।

    इसके बाद कुंस व गोची उत्सव

    अब कुंस मनाया जाएगा और फिर विभिन्न गांव में गोची उत्सव शुरू हो जाएगा। गाहर घाटी में उत्सवों का दौर चला रहेगा और उसके बाद धीरे धीरे खेती सीजन के लिए भी तैयार हो जाएंगे।

    क्यों मनाया जाता है हालडा उत्सव, क्या है मान्यता

    लाहौल घाटी में 'हालडा' उत्सव मुख्य रूप से नए वर्ष के स्वागत, समृद्धि और बुरी शक्तियों को भगाने के लिए मनाया जाता है। यह त्यौहार माघ महीने (आमतौर पर जनवरी-फरवरी) में मनाया जाता है, जब ऐसी मान्यता है कि स्थानीय देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर होते हैं और आसुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है।

    मान्यता है कि जब देवता स्वर्ग में होते हैं, तो बुरी आत्माएं घाटी में सक्रिय हो जाती हैं। उनसे रक्षा के लिए देवदार की टहनियों (शुल्मा) से मशालें (हालडा) बनाकर जलाई जाती हैं। लोग मशालें लेकर बुरी आत्माओं को क्षेत्र से भगाते हैं।

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