कुल्लू अस्पताल में महिला की मौत मामले पर फिर बवाल, स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे पर अड़े लोग; आमरण अनशन पर बैठे
कुल्लू अस्पताल में रजनी शर्मा उर्फ मंजू की मौत के मामले ने फिर तूल पकड़ा है। पीड़ित परिवार और सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे व न्याय क ...और पढ़ें
HighLights
कुल्लू अस्पताल में महिला की मौत का मामला गरमाया।
स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग पर आमरण अनशन।
पीड़ित परिवार ने जांच में लीपापोती का आरोप लगाया।
संवाद सहयोगी, कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू अस्पताल में रजनी शर्मा उर्फ मंजू की मौत मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है। पीड़ित परिवार, सामाजिक कार्यकर्ता बलदेव ठाकुर उर्फ बंटी सराजी और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सोमवार को कुल्लू के रथ मैदान में जन आंदोलन शुरू करते हुए आमरण अनशन पर बैठने का फैसला लिया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डा. धनीराम शांडिल नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं देते, तब तक अनशन जारी रहेगा।
रथ मैदान में करीब 300 लोग एकत्र हुए, जहां से प्रदर्शनकारी रोष रैली निकालते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। इस दौरान कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर दो दर्जन से अधिक पुलिस और होमगार्ड के जवान तैनात रहे। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन भेजा।
पति बोला- जांच के नाम पर लीपापोती हुई
मृतका के पति सतीश शर्मा ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी की मौत की जांच रिपोर्ट में लीपापोती की गई है और अब तक दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि न्याय नहीं मिलने के कारण अब आमरण अनशन ही अंतिम विकल्प बचा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अनशन के दौरान किसी की तबीयत बिगड़ती है या कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और प्रदेश सरकार की होगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए आंदोलन
सामाजिक कार्यकर्ता बलदेव ठाकुर उर्फ बंटी सराजी ने कहा कि यह केवल मंजू शर्मा को न्याय दिलाने की लड़ाई नहीं, बल्कि प्रदेश की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।