Kullu Landslide: बंदरोल में खतरे में करोड़ों रुपये से बने भवन, आखिर अचानक क्यों दरका पहाड़?
कुल्लू के बंदरोल में भूस्खलन से एक भवन ढह गया है, जिससे कई अन्य इमारतें, जिनमें सरकारी भवन और जवाहर नवोदय विद्यालय शामिल हैं, खतरे में आ गई हैं। ...और पढ़ें

कुल्लू के बंदरोल में हुआ भारी भूस्खलन, इस कारण साथ लगते भवन खतरे में आ गए हैं। जागरण
HighLights
बंदरोल में भूस्खलन से एक भवन ढहा, कई खतरे में।
अवैध खनन और प्रशासन की अनदेखी को बताया मुख्य कारण।
ग्रामीण तत्काल कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी।
संवाद सहयोगी, पतलीकूहल (कुल्लू)। हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में भूस्खलन की घटना ने झकझोर दिया है। खिली धूप के बीच अचानक पहाड़ी धंसी और एक भवन भरभराकर गिर गया। अब साथ लगते होटल व अन्य भवन भी खतरे की जद में आ गए हैं, प्रशासन ने इन्हें खाली करवा दिया है। कुल्लू के बंदरोल क्षेत्र में यहां भूस्खलन पहली बार नहीं हुआ है, तीन साल पहले 2023 में भी यहां भारी भूस्खलन हुआ था।
वर्ष 2023 की बाढ़ के बाद से ही पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा लगातार दरक रहा है। यदि प्रशासन ने इस भू-कटाव को रोकने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए, तो न केवल पर्यटन से जुड़ी संपत्तियां बल्कि करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन से बन रही सरकारी इमारतें भी नष्ट हो सकती हैं।
करोड़ों रुपये के भवन खतरे में
इस भूस्खलन के कारण करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सरकारी इमारतें और जवाहर नवोदय विद्यालय खतरे में आ गए हैं। यहां पर होटल कभी भी ब्यास नदी में गिर सकता है। यह भूस्खलन क्षेत्र नवोदय स्कूल से कुछ ही मीटर की दूरी पर है। इससे स्कूल के सैकड़ों छात्रों और शैक्षणिक संपत्ति की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों और स्थानीय निवासियों में चिंता बढ़ गई है।
आखिर क्या है भूस्खलन की वजह
स्थानीय ग्रामीणों ने इस तबाही का सीधा कारण ब्यास नदी के किनारों पर हो रहे अनियंत्रित अवैध खनन को बताया है। स्थानीय निवासी इशांत महंत, मदन कटोच और सतपाल ठाकुर ने आरोप लगाया कि खनन माफिया द्वारा नदी के तल से की गई छेड़छाड़ ही इस भूस्खलन की मुख्य वजह है।
प्रशासन की अनदेखी पड़ रही भारी
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण अवैध खनन बेरोकटोक जारी है, जिससे पहाड़ की नींव खोखली हो गई है। यदि इस पर रोक नहीं लगाई गई और भू-कटाव को नियंत्रित नहीं किया गया, तो बंदरोल क्षेत्र को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जमीन का आधार पूरी तरह खिसक चुका है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए और अवैध गतिविधियों की शिकायत की, लेकिन प्रभावी कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन ही मिले।
लोगों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों की एकजुटता के कारण ही पूर्व में नदी किनारे की बिहाल भूमि को लीज पर देने के सरकारी निर्णय को रद्द करवाया गया था, लेकिन इसके बावजूद चोरी-छिपे हो रही अवैध निकासी ने जमीन को भीतर से खोखला कर दिया है। स्थानीय जनता ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द प्रभाव से खनन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया और प्रभावित स्थल पर युद्ध स्तर पर सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं शुरू हुआ, तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।