हिमाचल पंचायत चुनाव: कुल्लू में पोलिंग पार्टी ने निभाई अनोखी देव परंपरा, कुर्सी के बजाय नीचे बैठकर करवाया मतदान
कुल्लू के सैंज घाटी में पंचायत चुनाव के दौरान कंढा मतदान केंद्र पर पोलिंग पार्टी ने स्थानीय देव परंपरा का सम्मान करते हुए कुर्सी के बजाय फर्श पर बैठकर ...और पढ़ें

कुल्लू के कंढा में कुर्सी के बजाय नीचे बैठकर मतदान करवाती पोलिंग पार्टी। जागरण
HighLights
कुल्लू में पंचायत चुनाव के दौरान अनोखी परंपरा।
पोलिंग पार्टी ने फर्श पर बैठकर कराया मतदान।
स्थानीय देव संस्कृति का सम्मान, बढ़ा मतदाताओं का उत्साह।
संवाद सहयोगी, सैंज (कुल्लू)। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के बीच जिला कुल्लू में गजब मामला सामने आया है। सैंज घाटी की ग्राम पंचायत तलाड़ा के वार्ड नंबर-1 स्थित कंढा मतदान केंद्र में शनिवार को लोकतंत्र और देवसंस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। पंचायत चुनाव के दौरान यहां मतदान प्रक्रिया सामान्य सरकारी व्यवस्थाओं से हटकर पूरी तरह स्थानीय देव परंपरा के अनुरूप संचालित की गई, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
दरअसल, कंढा गांव के कुछ क्षेत्रों में प्राचीन देव मान्यता के अनुसार कुर्सी पर बैठना और पलंग पर सोना वर्जित माना जाता है। जैसे ही मतदान केंद्र पर तैनात पोलिंग पार्टी को इस विशेष परंपरा की जानकारी मिली, उन्होंने स्थानीय आस्था और संस्कृति का सम्मान करने का निर्णय लिया।

इसके बाद मतदान केंद्र में कुर्सी और टेबल का उपयोग नहीं किया गया तथा पूरी मतदान प्रक्रिया कमरे के फर्श पर बैठकर संपन्न करवाई गई।
संवेदनशील पहल की सराहना
मतदान केंद्र में तैनात प्रिजाइडिंग अधिकारी मनोज महाजन, पोलिंग अधिकारी मनोज शर्मा, सोमदत्त और चरणजीत सहित सुरक्षा कर्मी भागादेई तथा ईश्वर दास पूरे दिन फर्श पर बैठकर अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहे। अधिकारियों और कर्मचारियों की इस संवेदनशील पहल की ग्रामीणों ने सराहना की और इसे स्थानीय परंपराओं के प्रति सम्मान का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।

लोगों में विशेष उत्साह दिखा
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक टीम द्वारा देव संस्कृति को सम्मान देने से लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। इसका असर मतदान प्रतिशत पर भी दिखाई दिया और बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्र पहुंचकर अपने मताधिकार का प्रयोग करते नजर आए।
कंढा मतदान केंद्र की यह तस्वीर केवल मतदान की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह संदेश भी दिया कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है, जब वह स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और जनभावनाओं का सम्मान करते हुए आगे बढ़े। यह दृश्य पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।
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