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    महिला कर्मचारी ने मरीज बनकर दवाएं खरीदी तो पता चला क्लीनिक अवैध, हिमाचल में झोलाछाप डॉक्टर पकड़ा

    By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Thu, 06 Aug 2026 11:39 AM (GMT+05:30)

    मंडी में बिना लाइसेंस एलोपैथिक दवाएं बेचने वाले एक फर्जी चिकित्सक पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कार्रवाई की है। अदालत ने जब्त दवाओं व अन्य सामग्रियों क ...और पढ़ें

    जिला मंडी के सुंदरनगर में झोलाछाप डॉक्टर पकड़ा गया है। प्रतीकात्मक फोटो

    जिला मंडी के सुंदरनगर में झोलाछाप डॉक्टर पकड़ा गया है। प्रतीकात्मक फोटो

    HighLights

    1. फर्जी डॉक्टर बिना लाइसेंस बेच रहा था एलोपैथिक दवाएं।

    2. मरीज बनकर टीम ने की दबिश, भारी मात्रा में दवाएं जब्त।

    3. अदालत ने जब्त सामग्री की कस्टडी ड्रग इंस्पेक्टर को सौंपी।

    जागरण संवाददाता, मंडी। बिना लाइसेंस अवैध रूप से एलोपैथिक दवाओं की बिक्री और भंडारण करने वाले एक फर्जी चिकित्सक के खिलाफ खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (जेएमएफसी) की अदालत ने मामले में जब्त दवाओं व अन्य सामग्रियों की कस्टडी ड्रग इंस्पेक्टर को सौंपने के आदेश दिए हैं।

    फर्जी मरीज भेजकर की छापामारी 

    ड्रग इंस्पेक्टर रीना कुमारी को सुंदरनगर के पौड़ाकोठी में बिना लाइसेंस एलोपैथिक दवाएं बेचे जाने की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद खाद्य एवं औषधि विभाग, स्थानीय पुलिस और स्वतंत्र गवाहों की संयुक्त टीम ने पौड़ाकोठी में बिना नाम के चल रहे क्लिनिक पर छापा मारा।

    मरीज बनकर दी दबिश

    टीम की सदस्य मंजू देवी ने मरीज बनकर क्लिनिक से दवाएं खरीदीं। खरीद की पुष्टि होते ही टीम ने मौके पर दबिश दी। क्लिनिक संचालक ने अपनी पहचान पश्चिम बंगाल निवासी संजीत कुमार राय के रूप में बताई। 

    दवाएं बरामद, नहीं था कोई लाइसेंस

    तलाशी लेने पर परिसर से भारी मात्रा में एलोपैथिक दवाएं सिरप, गोलियां, कैप्सूल, इंजेक्शन और सिरिंज बरामद हुईं। पूछताछ के दौरान आरोपित न तो दवा बिक्री का वैध लाइसेंस दिखा सका और न ही कोई आरएमपी (रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर) प्रमाणपत्र पेश कर पाया। दवाओं की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड मांगने पर वह केवल कुछ रसीदें ही दिखा सका।

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    अदालत ने ड्रग इंस्पेक्टर को सौंपी कस्टडी जांच

    यह औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 की धाराओं का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने अधिनियम की धारा 23(5)(बी) और 23(6) के तहत दायर आवेदन को स्वीकार करते हुए जब्त दवाओं और दस्तावेजों की कस्टडी जांच अधिकारी/ड्रग इंस्पेक्टर को सौंप दी। अदालत ने निर्देश दिया है कि जब्त सामग्री की फोटोग्राफी कर विस्तृत सूची तैयार की जाए और न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना इन्हें नष्ट न किया जाए।

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