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'बहू के निजी मकान में सास को भी रहने का अधिकार', हिमाचल हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी व्यवस्था

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 05 Aug 2026 01:28 PM (IST)

हिमाचल हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि बहू अपने निजी मकान से सास को बेदखल नहीं कर सकती। कोर्ट ने ...और पढ़ें

हिमाचल हाई कोर्ट ने बहू के बनाए मकान में सास को भी रहने का अधिकार दिया है। (फोटो एआई से बनाया है)

हिमाचल हाई कोर्ट ने बहू के बनाए मकान में सास को भी रहने का अधिकार दिया है। (फोटो एआई से बनाया है)

HighLights

  1. बहू निजी कमाई से बने मकान से सास को नहीं निकाल सकती।

  2. साझा गृहस्थी में रहने वाली हर महिला को कानूनी अधिकार।

  3. मालिकाना हक मायने नहीं रखता, घरेलू रिश्ता महत्वपूर्ण।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम पर स्पष्ट किया है कि भले ही मकान बहू की अपनी कमाई से खरीदा और बनाया हो, लेकिन यदि सास उसके साथ उस साझा गृहस्थी में रह रही थी तो बहू उसे जबरन बाहर नहीं निकाल सकती। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने बहू की याचिका को खारिज कर ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें सास के संयुक्त कब्जे को बहाल करने का आदेश दिया था।

बहू की दलील थी कि सास उसके विरुद्ध घरेलू हिंसा का मामला दर्ज नहीं करवा सकती और न ही बहू के स्वामित्व वाले मकान पर रहने का दावा कर सकती है।

दलील खारिज कर दी व्यवस्था

कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर व्यवस्था दी कि साझा गृहस्थी वह स्थान है, जहां दोनों पक्ष कभी भी एक साथ घरेलू रिश्ते में रहे हों। इसमें यह मायने नहीं रखता कि उस संपत्ति का मालिकाना हक या टाइटल किसके नाम पर है। घरेलू रिश्ते में रहने वाली हर महिला चाहे वह बेटी हो, बहन हो, पत्नी हो, बहू हो या सास हो उसे साझा गृहस्थी में रहने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।

तीसरे व्यक्ति को किरायेदार बनाकर सास को बेदखल नहीं कर सकती

हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता (बहू) किसी तीसरे व्यक्ति को किरायेदार बनाकर सास को घर से बेदखल या निष्कासित नहीं कर सकती थी। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट (मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मंडी और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मंडी) द्वारा सास को पुनः घर में कब्जा दिलाने का फैसला न्यायसंगत है।

यह है मामला

मंडी जिले के रामनगर की प्रतिवादी महिला के बेटे और याचिकाकर्ता बहू का मई 2013 में विवाह हुआ था। वर्ष 2024 तक सभी एक साथ रह रहे थे, इसके बाद पारिवारिक विवाद शुरू हो गया। बहू का दावा था कि उसने यह जमीन अपनी निजी कमाई से खरीदी और इस पर मकान बनाया। उसने सास और ससुर को मकान में लाइसेंसी तौर (बिना मालिकाना हक रहने की अनुमति) पर रखा था। विवाद बढ़ने पर बहू ने मकान में एक तीसरे व्यक्ति को बतौर किरायेदार रख लिया और सात नवंबर 2025 को सास-ससुर को घर से बेदखल कर दिया। इसके खिलाफ सास ने घरेलू हिंसा कानून के तहत अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

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